परमात्मा की खोज में

परमात्मा की खोज

हर एक महात्मा हम यही उपदेश देता है कि जब तक हमारी आत्मा अपने असल में जाकर नहीं समाती, तब तक इसका जन्म मरण के दुखो से छुटकारा नहीं हो सकता। इसीलिए हर एक को परमात्मा की खोज है। हम सब दुनिया के जीव अपनी अपनी अक्ल के अनुसार हजारों स्थानों पर उस परमात्मा को डूढ़ने में लगे हुए है। कोई मंदिरों, मस्जिदों,गुरुद्वारों में ढूंढता है,कोई हिमालय पर्वत पर खोज रहा है और कोई ग्रंथो पोथियों, वेद शास्त्रों में तलाश कर रहा है।

संत महात्माओं ने उपदेश किया है कि परमात्मा कहीं बाहर नहीं है।

कबीर साहिब फरमाते है:

ज्यो तिल माही तेल है, ज्यो चकमक में आग। 

तेरा साई तुज में ,जाग सके तो जाग।।

जिस तरह तिल में तेल है, पत्थर के अंदर अग्नि होती है, इसी तरह जिस परमात्मा को हम खोज रहे हैं, वह परमात्मा हमारे शरीर के अंदर बैठा हुआ है।

इसी तरह पलटू साहिब फरमाते है:

साहेब साहेब क्या करे साहेब तेरे पास”

कहते है,तुम किस साहेब को ढूंढते फिर रहे हो, वह साहेब तो चौबीस घंटे तुम्हारे साथ साथ है

हजरत ईसा : ने भी हमारे शरीर को टेंपल ऑफ लिविंग गॉड कहकर बयान किया है।

तुलसी साहिब फरमाते है:

क्यो भटकता फिर रहा तू ए तलाशे यार में।

रास्ता शाह रग में है दिलभर पै जाने के लिए।।

परमात्मा की खोज में क्यो मारे मारे फिर रहे हो, जंगलों, पहाड़ों में क्यो भटकते फिर रहे हो? वह परमात्मा तो तुम्हारे शरीर के अंदर बैठा हुआ है,और जो उस मालिक से मिलने का रास्ता है, वह भी तुम्हारे शरीर के अंदर है आज तक बाहर से न किसी को मिला है और न कभी मिलेगा।

गुरु अमरदास जी फरमाते है:

काईया अंदर जगजीवन दाता वसे सभना करे प्रतीपाला”

वह परमात्मा, जिसने सारी दुनिया की रचना की है, हमारे शरीर के अंदर बैठा है।

गुरु अमरदास जी एक और जगह फरमाते है:

आपे सभ घट अंधरे आपे ही बाहर।।

आपे गुप्त वरतदा आपे ही जाहर।।

जुग छतीह गुबार कर वर्तिआ सुंनाहरि।।

ओथे वेद पुरान न सासता आपे हरि नरहरि।।

बताते है, प्रभु जी लीला अपरंपार है।वह प्रत्येक जीव के ह्रदय में बसता है तो भी सबसे अलग और अलिप्त रहता है। वह अपने आपमें ही लीन रहना पसंद करे तो युगों के युग उसी तरह बिता देता है।तब केवल वह आप ही होता है, न कोई वेद, न पुरान, न शास्त्र, न कोई अन्य धर्म पुस्तक। वह प्रभु एक विशाल समुद्र की तरह है, कितना गहरा है यह वही जानता है। उसकी थाह पा सकने वाला अभी तक कोई पैदा नहीं हुआ।

Published by Pradeep Th

अनमोल मनुष्य जन्म और आध्यात्मिकता

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