
नाम या शब्द भाग 3 (divine power)
धुनात्मक नाम
अंतर में ध्वनि के रूप में आंतरिक कानों द्वारा सुने जाने वाले को धुनात्मक नाम कहते है। इसके अंदर एक और विशेषता होती है कि यह प्रकाश के रूप में अंतर की आंखो द्वारा दिखाई भी देता है। जिसे सुरत और नीरत का खुलना भी कहते है। सुरत यानी आत्मा की सुनने की शक्ति और नीरत यानी आत्मा की देखने कि शक्ति जाग्रत होना।
आदि ग्रंथ के पृष्ठ स 1232 गुरु नानक देव जी ने फरमाया है कि:
“हिरधे नाम सदा धुन निहचल घटे न कीमत पाई।।आपका इशारा धुनात्मक नाम की तरफ है कि नाम हमारे अंतर में निरंतर धुन रूप बज रहा है।
आदि ग्रंथ के पृष्ठ स 886 गुरु अर्जुन देव जी ने फरमाया है कि:
“निर्मल जोती अमृत हरि नाम।।
यह नाम जीव को अपने अंदर सुनाई ही नहीं देता बल्कि एक कभी न बुझने वाली दिव्य ज्योति के रूप में दिखाई भी देता है:
वार 20 पौड़ी 9पर भाई गुरदास जी ने फरमाया है कि:
“सच नाउ करतार आप उपाइया।।
यह संगीत मय ज्योति या प्रकाशमय धुन परमेश्वर आप पैदा करता है।
आदि ग्रंथ के पृष्ठ स 4 गुरु नानक देव जी ने फरमाया है कि:
“जेता कीता तेता नाउ।।
इसके द्वारा है सृष्टि की रचना करना है। जो कुछ भी हम देख रहे है वो सब उसका ही किया है
आदि ग्रंथ के पृष्ठ स 284 गुरु अर्जुन देव जी ने फरमाया है कि:
“नाम के धारे सगले जंत।। नाम के धारे खंड ब्रह्मांड।।इसी नाम के सभी जीव जंतुओं को पालता है और इसी के जरिए खंड ब्रह्मांड चल रहे है।
आदि ग्रंथ के पृष्ठ स 2 गुरु नानक देव जी ने फरमाया है कि:
“साचा साहिब साच नाइ।।
यह धुनात्मक नाम, अकाल नाम, अकाल पुरुष की भांति ही स्थायी है, अविनाशी है ,सच है।
आदि ग्रंथ के पृष्ठ स 229 गुरु नानक देव जी ने फरमाया है कि:
“घर घर नाम निरंजना सो ठाकुर मेरा।।
या तो यो कह दे खुद नाम ही परमेश्वर का रूप है। सारे खंड ब्रह्मांड को रचने वाला नाम ही खुद हरि है।
आदि ग्रंथ के पृष्ठ स1316 गुरु रामदेव जी ने फरमाया है :
“राम नाम रम रव रहे,रम रामों राम रमीति।।
रामनाम ही राम यानी परमात्मा में रमा हुआ है और परमात्मा का रूप रामनाम हर जगह रमा हुआ है। यह सर्व व्यापक है।
ऊपर सब बाणियो से पता चलता है कि परमात्मा अंतर में धुन और प्रकाश के रूप में ही मिलेगा। और यह हर एक जीव के अंतर है इसलिए परमात्मा को सर्व व्यापक कहते है।