अमृत कैसे प्राप्त होगा

अमृत का नाम सुनकर ऐसा लगता है कि जिसके सेवन से हम अमर हो जाय । सूफी फकीरो ने इसे ‘ आबे हयात’ यानी अमर जीवन प्रदान करने वाला जल कहा है। यह संसार, इसके सब पदार्थ और रिश्ते- नाते नाशवान है यानी एक दिन सबको खत्म हो जाना है। सारी त्रिलोकी मृत्यु और विनाश के प्रभाव में है। इसके विपरित वह प्रभु और उसका नाम या शब्द वह अमृत है, जिसे पीने से जीवात्मा मृत्यु और विनाश की सीमा से ऊपर उठकर अमर जीवन प्राप्त कर लेती है।

आदि ग्रंथ में पृष्ठ स 1323 पर गुरु रामदास जी फरमाते है:

हर हर नाम अमृत रस मीठा, गुरमत सहजे पीजै।।

आप कहते है कि हरि और उसका नाम (divine power) अमृत है। जिससे जुड़कर ही हम इस जन्म मरण के चक्कर से निकल सकते है। फिर हमे बार बार नहीं मरना पड़ता। इसीलिए कबीर साहिब ने अपनी बानी में कहा है ” जिस मरने से जग डरे मेरे मन आनंद, मरने से ही पाइए पूर्ण परमानंद”। ये अवस्था नाम रूपी अमृत प्राप्त होने के बाद ही होती है। अमृत सच्चे जीवन और सच्चे आनंद का स्रोत है।

आदि ग्रंथ में पृष्ठ स 1238-39 पर गुरु अंगत साहिब फरमाते है

नानक अमृत एक है, दूजा अमृत नाहि।।

नानक अमृत मनै माह ,पाइए गुर परसादी।।

आप कहते है कि केवल प्रभु या उसका नाम ही सच्चा अमृत,उसके बिना कोई ऐसी वस्तु नहीं,जिसमें अमर जीवन प्रदान करने की शक्ति हो। यह अमृत हर एक के अंदर है, परन्तु यह प्राप्त केवल उन खुशकिस्मत जीवों को होता है, जिन पर प्रभु और सतगुरु कृपा करे।

यह अमृत हमारे शरीर में कहा है? तो आदि ग्रंथ में पृष्ठ स 1323 पर गुरु रामदास जी बताते है कि :

नउ दरवाज नवे दर फिके, रस अमृत दसवें चुइजे।।

आप समझाते है कि हमारे शरीर के दस दरवाजे है। नौ दरवाजे- दो आंखें, दो कान, दो नासिकाए, मुंह तथा दो मल मूत्र के स्थान- बाहर संसार की तरफ खुलते है। इनका संबंध इन्द्रियों के भोगो और विषय विकारों के साथ है, जब कि नाम रूपी अमृत दसवें दरवाजे पर पहुंचने से प्राप्त होता है। जब हम ध्यान को आंखो के पीछे और मध्य स्थिर करते है, तब हमे अंतर म दसम द्वार पर शब्द या नाम का अमृत मिलता है।

एक उदाहण के जरिए भी समझ सकते है कि जिस तरह कस्तूरी हिरण की नाभि में होती है, परन्तु वह उसकी तलाश में बाहर भटकता है, उसी तरह नाम रूपी अमृत अंतर मे है,परन्तु मनमुख उसकी तलाश में बाहर भटकते है, इसीलिए उन्हें कभी भी सच्चे अमृत और अमर पद की प्राप्ति नहीं होती।

बाइबल में भी यही लिखा है

जो भी इसको पीएगा, फिर कभी भी उसे प्यास नहीं लगेगी।

Published by Pradeep Th

अनमोल मनुष्य जन्म और आध्यात्मिकता

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