
ये जीवन चार दिनों का मेला है। चार दिन का मतलब बचपन, किशोरावस्था, जवानी और बुढापा। ये जीवन की चार अवस्थाएं है जिन्हे संतो ने चार दिन भी कहा है। यह संसार की सारी चीजे झूठी है सिर्फ परमात्मा सत्य है। क्यो कि सबको एक दिन नाश हो जाना है।
आदि ग्रंथ के पृष्ठ स 1231 में नोवी पातशाही ने फरमाया है
का को तन धन, संपत्ति का की, का सिउ नेह लगाई। जो दिसे सो सगल बिनासे ज्यो बादर की छाई।।
हमारे तन से हम जो इतना प्यार करते है इसकी हद शमशान तक ही है और जो धन आज हमारा है वो कल किसी और का था। कल किसी और का हो जाएगा। क्यो इन नश्वर चीजों में मोह है…? एक दिन सबका विनाश पक्का है जैसे बादल की छाया हमेशा नहीं रहती थोड़ी देर ही रहती है वैसे ही ये संसार की चीजे हमारा कभी साथ नहीं देती है। एक न एक दिन इन्हे हमे छोड़ना है या ये हमे छोड़ देती है।