संगति

संत कबीर

जीव पर संगति का गहरा प्रभाव पड़ता है। हम अच्छे लोगो की संगति में अच्छे और बुरे लोगो की संगति में बुरे बन जाते है। व्यावहारिक जीवन में देखते है कि अगर हम चोरों, नशा करने वालो, जुवारियो आदि की संगति में रहते है, तो हमारे अंदर भी वैसे संस्कार और वैसी आदते पैदा हो जाती है। जब बच्चा बड़ा होकर घर से बाहर पाव रखता है, तो माता पिता उसे सबसे पहले बुरे लोगो की संगति से बचने का उपदेश देते है।

संत मत में कुसंगती का अर्थ बुरे लोगो की संगति ही नहीं है। कुसंगती से भाव दुनियादारो और मनमुखो की संगति भी है। दुनियादार और मनमुख जब भी बात करते है, इस दुनिया, इसके शक्लों पदार्थो, मायावी धंधों, कोमो, मजहबों, मुल्कों के झगड़ो आदि की ही करते हैं। ऐसे लोगो की संगति में भूले भटके भी मन प्रभु भक्ति या प्रभु प्रेम की ओर जा ही नहीं सकता। जैसे काजल की कोठरी में जाने से काजल का दाग लग जाना स्वाभाविक है, इसी तरह मन्मुखो की संगति में में पर माया की मलीनता का प्रभाव होना स्वाभाविक है।

फारसी की कहावत है ” हर किह काने नमक आयद नमक शवद “

यानी जो कुछ भी नमक खान मै जाता है, नमक बन जाता है। दुर्जनो की संगति में जीव प्रभु को भूल जाता है, उसका प्रभु के नाम की ओर ध्यान ही नहीं जाता और वह कई प्रकार के पापो और विकारों में लिप्त हो जाता है। वह प्रभु द्वारा संसार मे भेजे जाने के अपने असल मकसद को भूल जाता है। नतीजा यह होता हैं कि वह माया की दलदल में धसकर सदा चौरासी की चक्की में पिसता रहता है। इसीलिए संत महात्मा साधक को प्रभु भक्ति और परमार्थ में उन्नति के लिए कुसंगति से बचने और सत्संगती में रहने का उपदेश देते है।

संतो महात्माओं ने कुसंगति को नरक का द्वार कहा है, तो सत्संग को सतलोक में पहुंचने का साधन माना है। संत समझाते है कि संतो कि संगति चंदन के वृक्ष के समान है। जिस जंगल में चंदन होता है, उसके आप पास के सब वृक्षों में से चंदन की सुगंध आने लगती है। संतो का ध्यान हमेशा प्रभु में लीन रहता है। संत प्रभु प्रेम और प्रभु भक्ति की ऐसी अलौकिक किरणे नकलती है जिनका उनकी संगति में आने वाले हर जीव पर प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है।

इसीलिए संत महात्मा हमे प्रभु प्रेम और प्रभु भक्ति से दूर ले जाने वाले लोगो की संगति से बचने और ऐसे प्रभु भक्तों की संगति खोजने का उपदेश देते है जिससे हमारा ध्यान प्रभु, प्रभु भक्ति और नाम की कमाई की तरफ जाए।

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Published by Pradeep Th

अनमोल मनुष्य जन्म और आध्यात्मिकता

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