
ज्योतिष द्वारा लोग भविष्य में घटनेवाली शुभ और अशुभ घटनाओं का पता लगाने का प्रयत्न करते है।लोग ज्योतिष विद्या द्वारा यह जानने का प्रयत्न करते है कि किस काम के लिए कौन सी घड़ी या कोन सा मुहूर्त शुभ है। इसी तरह वे यह जानने की भी कोशिश करते है कि किन स्थानों पर जाना और किन लोगो के साथ संबंध बनाना शुभ या अशुभ होगा।
पर आजकल ज्योतिष एक व्यवसाय बन गया है। अधिकतर ज्योतिष लोगो के मनोविज्ञान से लाभ उठाने का प्रयत्न करते है। जरूरी नहीं कि ज्योतिष का ज्योतिष ठीक हो। उसके गणित या हिसाब में गलती हो सकती है, जो जन्म पत्री आदि हम लेकर जाते है, वह गलत हो सकती है और अगर ज्योतिष को ठीक बात का पता चल भी जाय तो भी वह डरते हुए पूरा सत्य नहीं बताता।
जिस तरह किसी व्यक्ति को नशे की आदत पड़ जाती है और वह बार बार नशा करता है, उसी तरह हमे ज्योतिषों के पास जाने की आदत पड़ जाती है। अधिकतर ज्योतिषी इसका पूरा लाभ उठाते है। ऐसे ज्योतिष बहुत कम है, जो ज्योतिष को एक धंधे, व्यापार या आजीविका के साधन के रूप में नहीं, केवल एक विज्ञान के रूप में इस्तेमाल करते है। जिस तरह नशा करने से मनोबल निर्बल होता जाता है, उसी तरह ज्योतिष द्वारा मनोबल निर्बल हो जाता है और हमारी हालत से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है।
ज्योतिष विद्या गलत नहीं है। लेकिन सच्चे ज्योतिष बहुत कम होते है। वास्तव में ज्योतिष से कोई लाभ नहीं हो सकता क्योंकि ज्योतिष भविष्यवाणी भले ही कर ले, पर होनी को नहीं टाल सकते।
गुरु राम दास जी कहते है:(आदि ग्रंथ पृष्ठ स ११३५)
- मता मसूरत तां किछु किजै, जे किछ होवै हर बाहर।।
- जो किछ करे सोई भल होसी, हर धिआवहू अनदिन नाम मुरारि।।
जो कुछ होना है, प्रभु की रजा के अनुसार होना है और जो कुछ होना है, वह अटल है। तो फिर लग्न, मुहूर्त या भविष्य के बारे में सोचकर परेशान होने का क्या लाभ है?
कबीर साहिब की शब्दावली में भाग १ पेज न ५५ पर लिखा है:
- करम गति टारे नहि टरी।।
- मुनि बशिष्ठ से पंडित ज्ञानी, सोध के लगन धरी।
- सीता हरण मरण दसरथ को, बन में बिपती परी।।
आप समझाते है कि भगवान राम की शादी का मुहूर्त मुनिवर वशिष्ठ ने निकाला था, लेकिन फिर भी रावण सीता को उठाकर ले गया, राम के पिता दशरथ की मृतयु हो गईं और राम को चौदह वर्ष का वनवास मिला। वशिष्ट जैसे महान ऋषि भी होनी को टाल न सके।
महात्मा जल्हण हास्यमय शैली में कहते है ( वाणी भगत जल्हण, पृष्ठ स ५)
- घर वैंदा दे पिटना, घर ब्रह्मण दे रंड।
- चल जल्हण घर आपने, साहा वेख न संग।।
ज्योतिष दूसरों के प्रारब्ध के बारे में भविष्यवाणी करते है, लेकिन किसी ज्योतिष कि बहु विधवा हो चुकी है और किसी की बेटी। इसीलिए ज्योतिष के भ्रम में पड़ना घोर अज्ञानता है।
हमारा ज्योतिषयों के पास जाना इस बात का सबूत है कि हमे न तो प्रभु में भरोसा है और न ही अपने आप में विश्वास है। यदि ज्योतिषियों का बताया हुआ उपाय होनी को टाल सकता है तो फिर हमे प्रभु की भक्ति छोड़कर ज्योतिषियों की भक्ति में लग जाना चाहिए।
गुरु अर्जुन देव जी फरमाते हैं: ( आदि पृष्ठ स १३६)
- माह दिवस मूरत भले, जिस को नदर करे।।
- नानक मंगे दरस दान, किरपा करह हरे।।
सब महीने, दिन और मुहुर्त उस प्रभु के बनाए हुए है, इसीलिए वे सब ही उत्तम है। कोई भी समय अच्छा या बुरा नहीं होता। हमारी वृती या दृष्टि ही अच्छी या बुरी होती है। जिस समय भी हम कोई शुभ कार्य करते है और जिस समय भी हमारा ध्यान प्रभु की भक्ति या नाम की कमाई कि और जाता है, वही समय धन्य है।
बहुत खूब।
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धन्यवाद
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I like the way you have compared fortune telling to an addiction. It is so true for some people.
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Thanks dear for encouraging me.
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Really an addiction.
Meàningful explaination.
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