गलत यात्रा (wrong path)

अगर दिन में जब आप किसी भी समस्या का सामना नहीं करते है तो – आप यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि आप गलत रास्ते पर चल कर रहे हैं।”  – स्वामी विवेकानंद

आज सुबह ये सुंदर विचार पढ़ा तो सोचा आपके साथ सांझा करू। स्वामी विवेकानन्द जी कहते है कि अगर हमारी जिंदगी बहुत अच्छी चल रही कोई प्रॉब्लम भी नहीं है तो हमको यह समझना है कि हम सही रास्ते पर नहीं है। इसका यह मतलब नहीं कि जिंदगी अच्छी जीना अच्छा नहीं है। यह उन्होंने आध्यात्मिक दृष्टिकोण से कहा है कि हम अपने असल मंजिल की ओर यात्रा न करके दुनिया के धंधों में फसे है। हमारी इस मनुष्य योनि का असल मकसद ही परमात्मा को पाना है।

आदि ग्रंथ (पृष्ठ स४३) में गुरु अर्जुन देव जी यही फरमाते है :

  • प्राणी तू आया लाहा लेन।।
  • लगा कित कुफकड़े सभ मुकती चली रैन।।

आप कहते है कि प्राणी ! तू यहां है सिर्फ इस मनुष्य जनम से लाभ कमाने के लिए, पर यहां आकर फालतू के कामो में लग गया है। क्यो यहां कमाया कुछ भी साथ नहीं जाता है तो फिर क्यो इकट्ठा करने में लगा हुआ है। इस दिन और रात का ये सिलसिला खत्म होने वाला है यानी हम हर रोज मौत के करीब जा रहे है।

आदि ग्रंथ में पृष्ठ स २५१ पर कहा गया है कि

या जुग में तू एकह को आईया ।।

यहां भी यही लिखा है कि हम इस संसार में सिर्फ एक काम के लिए आए है । लेकिन हम उस काम को छोड़कर सब काम कर रहे है।

आपका कहने का अर्थ ये भी है कि सब जिम्मेदारी के काम करने है पर इनकी सीमा बयान कि है आपने। हमे परमात्मा की प्राप्ति को प्राथमिकता पर रखकर बाकि काम करने चाहिए।

Published by Pradeep Th

अनमोल मनुष्य जन्म और आध्यात्मिकता

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