मनुष्य के सामने यह सवाल हमेशा से रहा है कि परमात्मा वास्तव में है भी या नहीं। यदि है तो उससे मिलाप कैसे हो सकता है।इस विषय पर कई ग्रंथ पोथियां लिखी गई, पर इसका सही जवाब वक्त के पूर्ण संत सतगुरु जी दे सकते है क्यो कि वे परमात्मा से मिलाप कर चुके होते […]
परमात्मा कहा है?
हैं परमात्मा इस जग में
प्रत्यक्ष प्रमाण हमारे पास यहां
आओ दिखलाऊँ अभी जग को
कितने परमात्मा है यहा।।
देखो आप सूर्य को देखो
कितना प्रकाश हैं वहाँ
पहला परमात्मा दर्शन
साक्षात कर लो आप यहाँ।।
देखो चाँद को आप देखो
शीतलता कितनी है वहाँ
नही जग उस से कोई शीतल
है इस्वर का प्रमाण यहां।।
देखो अपनी छाया खुद
स्वयम देख दो आप यहां
प्रकाश साथ उतपन्न अँधेरा
परमात्मा साक्षात दिखे यहां।।
देखो हवाएं जो दिखे नही
किरणों को कोई पकड़े नही
जो दिखे नही पर होता यही
अहसास जग को नित्य कराए अभी।।
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आपकी कविता बहुत अच्छी है, आपके कॉमेंट का हमे हमेशा इंतज़ार रहता है।
आपने अच्छा लिखा है, पर हम इस बात से सहमत नहीं है। एक बात है कि परमात्मा जब तक दिखाई ना दे तब तक एहसास है। जब दिखाई देता है तो इन आंखो से नहीं दिखाई देता। गुरु नानक देव जी ने आदि ग्रंथ में फरमाया है
नानक से अखड़िया बि अन, जिनी डिसंडो मा पिर।
(पेज नंबर 577)
वह तो अंतर की आंखो से यानी तीसरे तिल में दिखाई देता है जी।
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ThankS
नज़र नज़र का फर्क सिर्फ हैं
समझ समझ का फर्क यहां
जो देखे परमात्मा यहां
पागल लोग उसे कहे यहां।।
सहन ना कर सके वो शक्ति
इंसान की इतनी औकात नही
सब अर्जुन बन नही सकते आज
परन्तु एकलव्य भी कम नही।।
एकलव्य अर्थात अहसास यहां पर
अर्जुन साक्षात को कहा यहां
आप अनुमान लगा सको
अब को देखे सत्य यहा।।
अहसास में छुपा भगवान हैं
आज सत्य धारणा हैं यहां
अहसास ही जगत में सत्य हैं
लोग महसूस को अहसास समझे यहां।।।
ध्यान लगाओ खुद दिखेगा
आज नही तो कल यहां
होगा अँधेरा दिखेगा लाल
लाल बिंदु एक दिखेगा वहां।।
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