
संसार की चौरासी लाख योनियों का सिरजन होते हुए भी मनुष्य की कुछ अपनी मजबूरियां है। अगर मनुष्य को कुछ बताना या समझाना हो तो वह उससे ही समझ सकेगा जो उसी जैसा होकर उससे बात करे। सिरजनहार प्रभु जब अपनी दया मेहर के कारण अपनी पैदा की हुईं विशेष आत्माओं का उद्धार करना चाहता […]
पूर्ण गुरु परमात्मा का ही रूप है