सतगुरु

सतगुरु : सन्त – सतगुरु मालिक का नर – रूप अवतार है जिसके अन्दर सत्य प्रकट है और जो सत्य से अभेद है । उसके अन्दर सत्य रमा हुआ है । मालिक से मिलकर उसमें मालिक का तेज आ गया । वह पवित्र हस्ती है , उसमें सत्य ख़ुद देह – स्वरूप में प्रकट है । वह ज्ञान का पुंज और भक्ति का स्रोत है , वह जीवों को सच्चे पथ का पथिक बनाकर धुर – धाम तक पहुँचाने की सामर्थ्य रखता है । वह मानव के रूप में ईश्वर है । ग्रन्थ – पोथियाँ हमारा सत्य से स्पर्श नहीं करवा सकतीं । आत्म – विद्या सिखाई नहीं जा सकती , वह एक स्पर्श की भाँति अनुभव की जाती है । जीवित कौन है ? गुरुबानी बताती है , केवल वही जीवित है जिसके अन्दर मालिक बस गया है :

सो जीविआ जिसु मनि वसिआ सोइ ॥ नानक अवरु न जीवै कोइ । आदि ग्रन्थ , पृ . 142

सतगुरु रब + इनसान है । वह परमात्मा के बोलने या प्रकट होने का माध्यम है । उसके वचन प्रभु के वचन होते हैं , चाहे देखने में वे इनसान के मुँह से निकलते प्रतीत होते हैं :

मुतलक़ आं आवाज़ ख़ुद अज़ शाह बुवद , गरचिह् अज़ हलकूमे – अब्दुल्ला बुवद । म मसनवी , मौलाना रूम , दफ़्तर 1 , पृ .213

सतगुरु के केवल उपदेश से ही रूहानी लाभ नहीं पहुँचता , बल्कि उसकी संगति से भी पहुँचता है जो आत्मिक जीवन देनेवाली , जाग्रति पैदा करनेवाली और आत्म – रस प्रदान करनेवाली है । सतगुरु की संगति में आत्मिक रस की जाग लगती है । उसकी मौज और दया तन , मन , और आत्मा को प्रफुल्लित करनेवाली होती है । वह अपनी एक दृष्टि , एक स्पर्श , एक वचन या ध्यान के द्वारा हमारे अन्दर आत्मिक आनन्द पैदा कर सकता है । वह शिष्य को आत्मिक जीवन की सम्पत्ति नक़द रूप में दे सकता है । वह आत्मिक जीवन का भोजन है जो शिष्य को सन्तुष्ट और तृप्त करता है । लेकिन यह भोजन कोई भूखा – प्यासा ही ले सकता है । सतगुरु आत्मज्ञान का सरोवर है , जिसमें से शिष्य अपनी सामर्थ्य के अनुसार रस ले सकता है ।

गुरु आदर्श पुरुष है । उसका शरीर वह द्वार है जहाँ बैठकर परमेश्वर अपना कार्य करता है । गुरु पूरा हो तभी परमार्थी का काम बनता है । अज्ञानी या अधूरे गुरु से परमार्थ की प्राप्ति नहीं होती :

जाको गुरु है आँधरा , चेला काह कराए । अंधा अंधा मेलिया , दूनो कूप पराए । कबीर साहिब , बीजक , पृ .97

गुरू जिना का अंधुला चेले नाही ठाउ ॥ बिनु सतिगुर नाउ न पाईऐ बिनु नावै किआ सुआउ ॥ आदि ग्रन्थ , पृ .58

Published by Pradeep Th

अनमोल मनुष्य जन्म और आध्यात्मिकता

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