
यदि खुश्क पत्थर या संगमरमर है तो कामिल फकीर की सोहबत में जाने पर तू हीरा बन जायेगा ।67
हजरत अब्दुल कादिर जीलानी फ़ारस देश के बहुत कमाई वाले महात्मा थे । मुसलमानों में फकीरों के दर्जे होते हैं – कुतुब , गौस आदि । किसी जगह मौलाना रूम का क्रुतुब मर गया था । वहाँ के लोगों ने आकर अर्ज़ की कि हज़रत , हमें कुतुब चाहिए । आपने कहा कि भेज देंगे । कुछ दिनों तक जब कुतुब न भेजा तो उन्होंने सोचा शायद हममें से किसी को क़ुतुब चुनना होगा , तो वे फिर आये और अर्ज़ की कि हज़रत , कुतुब चाहिए । कहने लगे , ‘ भेज देंगे । थोड़ा और धैर्य रखिये , यह इतना आसान नहीं , ऐसे काम के लिए कुछ समय चाहिए । ‘
कुछ दिन इंतज़ार करने के बाद लोगों ने तीसरी बार अर्ज़ की कि कुतुन की सख्त ज़रूरत है इसलिए क़ुतुब जल्दी भेजा जाये । आपने कहा , ‘ अच्छा कल ले जाना । ‘ हज़रत अब्दुल क़ादिर अंतर्यामी थे । उन्हें मुरीदों में कोई भी ऐसा कमाईवाला नज़र नहीं आया जो क़ुतुब के लायक हो । मन में सोचा कि क़ुतुब कहाँ से देंगे ।
रात को एक चोर पीर साहिब के यहाँ उनकी घोड़ी चुराने के लिए आया । पहले आगे के पैर खोले , फिर पीछे के । जब पीछे के खोले तो आगे के बँध गये । जब आगे के खोले तो पीछे के बँध गये । चोर हठीला था । तय कर लिया कि घोड़ी ज़रूर लेकर जानी है । सारी रात खोलता रहा । जब भजन का वक़्त हुआ तो पीर साहिब जागे । क्या देखते हैं कि एक व्यक्ति घोड़ी खोल रहा है । आपने पूछा , ‘ भाई , तू कौन है और क्या कर रहा है ? ‘ उसने कहा , ‘ हज़रत ! मैं चोर हूँ , सारी रात लगा रहा और बना कुछ भी नहीं ! ‘ आपको उसकी यह अदा पसंद आ गयी कि इसने सच कहा है । प्यार के साथ कहा , ‘ आ तुझे यह घोड़ी दे दूँ । ‘ ज्यों ही नज़र भरकर उसे देखा , उसे चोर से क़ुतुब बना दिया । जब दिन हुआ तो उन लोगों ने आकर अर्ज़ की कि हज़रत , हमें क़ुतुब दो । आपने कहा कि जैसा मैंने आप से वायदा किया था , यह रहा तुम्हारा क़ुतुब और तुम देखोगे कि इतना श्रेष्ठ क़ुतुब सारी दुनिया में नहीं होगा ।
गुरु अपनी दयादृष्टि से जो चाहे कर दे ।