मालिक सब देखता है

ऐसा कोई स्थान नहीं जहाँ मालिक नहीं है । तेरी बादशाहत से कहाँ जाऊँ ? तेरी हुजूरी से भागकर कहाँ जाऊँ ? यदि मैं आसमानों पर चढ़ जाऊँ , तू वहाँ भी मौजूद है । यदि पाताल में अपना डेरा तान लूँ तो तू वहाँ भी है ।129 साम्ज़

किसी महात्मा के पास दो आदमी नाम लेने आये । उनमें से एक अधिकारी था , दूसरा अनधिकारी । महात्मा कमाईवाले थे । उन्होंने दोनों को एक – एक बटेर * दे दिया और कहा कि जाओ , इनको उस जगह जाकर मार लाओ , जहाँ कोई और न देखे । उनमें से एक तो झट से पेड़ की ओट में जाकर बटेर को मारकर ले आया । जो दूसरा था वह उजाड़ में चला गया ।

अब वह सोचता है कि जब मैं इसे मारता हूँ तो यह मुझे देखता है और मैं इसे देखता हूँ । तब तो हम दो हो गये , तीसरा परमेश्वर देखता है , मगर महात्मा का हुक्म था इसे वहाँ मारो जहाँ कोई न देखे । आखिर सोच – सोचकर बटेर को महात्मा के पास ले आया और बोला कि महात्मा जी ! मुझे तो ऐसी कोई जगह नहीं मिली जहाँ कोई न देखता हो क्योंकि मालिक हर जगह मौजूद है । महात्मा ने कहा , मैं तुझे नाम दूंगा और दूसरे से कहा , जाओ , अपने घर !

इसलिए अगर मालिक को हर जगह हाज़िर – नाज़िर समझें , तो हम कोई ऐब , पाप या बुरा काम न करें ।

Published by Pradeep Th

अनमोल मनुष्य जन्म और आध्यात्मिकता

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