शाहजहाँ की नम्रता

जब ख़ुदी मिट जायेगी तो तुम्हारा अपने प्रियतम से मिलाप हो जायेगा । इसलिए ऐ अक्लमंद इंसान ! ख़ुदी को मिटाने की कोशिश कर और आजिज़ बन ।मौलाना रूम

दोपहर का वक़्त था । बादशाह शाहजहाँ को प्यास लगी । इधर – उधर देखा , कोई नौकर पास नहीं था । आम तौर पर पानी की सुराही भरी हुई पास ही रखी होती थी , पर उस दिन सुराही में एक चूंट भी पानी न था । कुएँ पर पहुँचा और पानी निकालने लगा । ज्यों ही बाल्टी पकड़ने के लिए आगे को झुका , तो भौनी * माथे में लगी । बोला , ‘ शुक्र है ! शुक्र है ! शुक्र है ! मेरे जैसे बेवकूफ़ को जिसको पानी भी निकालना नहीं आता , मालिक ने बादशाह बना दिया । यह उसकी रहमत नहीं तो और क्या है ? ‘

मतलब यह कि दुःख में भी मालिक का शुक्र मनाना चाहिए ।

Published by Pradeep Th

अनमोल मनुष्य जन्म और आध्यात्मिकता

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