सच्चा परोपकारी

गुलाम सदा घर में नहीं रहता ; परंतु पुत्र सदा रहता है । यदि ‘ पुत्र ‘ तुम्हें स्वतंत्र करेगा तो सचमुच तुम स्वतंत्र हो जाओगे । सेंट जॉन

जेलखाने में कैदियों की बुरी हालत देखकर एक परोपकारी आता है और यह सोचकर कि इनको ठंडा पानी नहीं मिलता , दस – बीस बोरियाँ चीनी की लाकर और कुछ बर्फ़ मिलाकर ठंडा शरबत पिलाकर उनको खुश कर जाता है । एक दूसरा परोपकारी आता है और यह देखकर कि उनको अच्छे गेहूँ की रोटी नहीं मिलती , बाजरा खाते हैं , कई मन मिठाई मँगवाकर खिला देता है । कैदी और खुश हो जाते हैं । इसी प्रकार तीसरा परोपकारी आता है और देखता है कि उनको अच्छे कपड़े नहीं मिलते , बल्कि मोटे मिलते हैं । वह उनको अच्छे नये कपड़ों की पोशाकें बनवाकर पहना देता है । कैदी और भी ख़ुश हो जाते हैं । उन सबने सेवा की , सेवा करनी भी चाहिए , लेकिन कैदी जेलखाने में ही रहे । हमें भी परोपकार करना चाहिए , लेकिन हमारा परोपकार किसी को चौरासी के जेलखाने से आज़ाद नहीं कर सकता । अब फिर इस जेलखाने की मिसाल की तरफ़ आओ । एक व्यक्ति के पास जेलखाने की कुंजी है । वह आकर जेलखाने के दरवाज़े ही खोल देता है और कैदियों से कहता है कि अपने – अपने घर चले जाओ । सबसे अच्छा परोपकारी कौन हुआ ? आप ख़ुद ही सोच सकते हैं । जिसने आज़ाद कर दिया ।

संत – महात्मा दुनिया के जेलखाने की कुंजी लेकर आते हैं और वह कुंजी नाम है ।

Published by Pradeep Th

अनमोल मनुष्य जन्म और आध्यात्मिकता

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