फ़क़ीर और चींटियाँ

जिस दिल में सब जीवों के लिए प्रेम और दया होती है , उसमें विषय – विकारों के लिए कोई स्थान नहीं होता । ऐ दोस्त ! कभी किसी दिल को ठेस न पहुँचाना । किसी का दिल दुखाना प्रभु को भूल जाना है ।अन्सारी ऑफ़ हैरात ‘

तज़करात – उल – औलिया ‘ मुसलमानों की एक रूहानी पुस्तक है । उसमें एक छोटी – सी कहानी आती है कि एक बार एक फ़क़ीर जब सफ़र पर निकला तो उसने साथ में रोटी बाँध ली कि वह रास्ते में खायेगा । रात को एक मसजिद में सोया , सुबह उठकर दस बारह मील सफ़र किया । फिर खयाल आया कि रोटी खा लूँ । जब रोटी की गठरी खोली तो देखा कि रोटी चींटियों से भरी पड़ी थी । फ़क़ीर को बहुत दुःख हुआ कि मैं इनको कितनी दूर ले आया हूँ , इस जगह इनका कोई घर – बार नहीं है । कोई अपनी माँ छोड़कर आयी है , कोई अपना बाप छोड़कर आयी है , कोई बच्चे छोड़कर आयी है । यह सोचकर वह वापस चल पड़ा और दस बारह मील का सफ़र करके वापस उसी मसजिद में आया । रोटी झाड़ी और चींटियों से कहा कि जाओ अपने – अपने घर को । मज़हब क़त्लो – ग़ारत ( मारना – काटना ) नहीं सिखाता , बल्कि दया सिखाता है ।

Published by Pradeep Th

अनमोल मनुष्य जन्म और आध्यात्मिकता

Leave a comment

Design a site like this with WordPress.com
Get started