शरण का प्रताप

गुरु बिन तेरा और न कोई । धार बचन यह मन में ॥ स्वामी जी महाराज

भागवत में एक कथा आती है कि एक बीमार और कमज़ोर बकरी अपने घर से भटककर दूर किसी घने जंगल में चली गयी । ख़तरे भरे इतने विशाल और घने जंगल में उस का बचाव करनेवाला कोई नहीं था । इसलिए उसे किसी सहारे की ज़रूरत थी ताकि वह खाने – पीने के लिए स्वतंत्रता से चल – फिर सकती । शेर उस जंगल का राजा था । उसने उस बकरी पर दया करके उसे आज़ाद कर दिया । वहाँ हाथी भी रहते थे । शेर ने उनसे कहा कि जब तुम पानी पीने जाओ , इसको भी साथ ले जाकर पानी पिला लाया करो । वह हाथी के ऊपर चढ़ जाती और पानी पीकर आ जाती । इस तरह वह सुरक्षित होकर ख़ुशी – ख़ुशी जंगल में अपना जीवन गुज़ारने लगी । यह सारा प्रताप शरण लेने का है । इसी तरह संतों की शरण में आकर जीव राई से पहाड़ और एरंड से तुलसी बन जाता है यानी नीच गति से संत बन जाता है ।

Published by Pradeep Th

अनमोल मनुष्य जन्म और आध्यात्मिकता

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