कबीर साहिब और रानी इन्दुमती

संत जब तक शरीर में रहते हैं , यह नहीं कहते कि हम गुरु हैं । वे दीनता और नम्रता रखते हैं । महाराज सावन सिंह

रानी इन्दुमती , संत कबीर जो काशी में कपड़ा बुनकर अपनी जीविका कमाते थे , की अनन्य भक्त थी । जब कबीर साहिब रानी इन्दुमती को सचखंड ले गये तो उसने देखा कि वहाँ भी वही कबीर साहिब कुलमालिक हैं । कहने लगी , अगर आप मुझे मृत्युलोक में ही बता देते तो इतनी मेहनत करने की क्या ज़रूरत थी ? कबीर साहिब ने कहा , ‘ क्या तू वहाँ मुझे मानती ? कह देती कि एक मनुष्य है जो कहता है कि मैं सतपुरुष हूँ । ‘

अगर संत कह दें कि हम ऐसे हैं तो कोई माने ही नहीं । संत जो ताक़त लेकर आते हैं , उसको ज़ाहिर नहीं करते बल्कि चुप रहते हैं । सो मतलब यह है कि लोगों को संतों की ख़बर नहीं होती कि वे क्या हैं , किस देश से आते हैं ? अगर ख़बर होती तो क्या गुरु नानक देव जी से चक्की पिसवाते , दूसरे संतों से भी ऐसा व्यवहार करते ?

Published by Pradeep Th

अनमोल मनुष्य जन्म और आध्यात्मिकता

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