गुरु और मालिक में कोई अंतर नहीं , दोनों वास्तव में एक ही हैं । महाराज सावन सिंह
एक पादरी हमेशा बड़े महाराज जी के साथ बहस करता रहता था । एक बार जब आप ब्यास स्टेशन पर उतरे , तो वह बोला कि एक सवाल का जवाब दो । आपने कहा , ‘ बड़ी ख़ुशी से जो पूछना है , पूछो । ‘ उसने कहा मुझे बताओ कि गुरु नानक साहिब बड़े हैं या कबीर साहिब बड़े हैं या बाबा जैमल सिंह जी ? बड़े महाराज जी ने कहा , ‘ भाई ! सभी को मेरे सामने खड़ा कर दो , मैं बता दूँगा कि कौन बड़ा है । ‘ वह कहने लगा , ‘ यह तो मैं नहीं कर सकता । ‘ तब आपने कहा , ‘ भाई ! मैंने तो बाबा जैमल सिंह जी को देखा है , मैं तो उनके बारे में ही कुछ कह सकता हूँ , लेकिन जिनके मैंने कभी दर्शन नहीं किये , उनकी आपस में तुलना करना मेरे लिए नामुनासिब है । ‘
सभी संत – सतगुरु एक ही धाम से आते हैं , उनकी तुलना का सवाल ही पैदा नहीं होता ।