बेदाग दाढ़ी

मन हमारा दुश्मन है और इसे दुश्मन समझते हुए इसकी हरकतों पर चौकीदारी करनी चाहिए । महाराज सावन सिंह

एक स्त्री थी । उसके रिश्तेदारों में एक अच्छा कमाई वाला महात्मा था । कुछ तो कमाई और कुछ बेफ़िक्री और बेपरवाही के फलस्वरूप उसके चेहरे पर हमेशा रौनक़ और ख़ुशी रहती थी । उसकी शोभायमान दाढ़ी थी जिसे वह कई वर्षों से पाल रहा था । एक दिन उस स्त्री ने पूछा , ‘ तेरे मुँह पर यह क्या है ? दाढ़ी है या झाड़ी ? ‘ वह महात्मा चुप रहा । इसी प्रकार वह औरत अकसर उसे चिढ़ाती रहती क्योंकि उसने किसी की इतनी सुंदर दाढ़ी नहीं देखी थी , पर वह महात्मा ख़ामोश रहता । जब उसकी मौत का समय निकट आया तो उसने उस स्त्री को बुलवाया । वह औरत सामने आयी तो महात्मा ने उससे कहा , ‘ अब वह बात पूछो । ‘ उसने आदेश का पालन करते हुए पूछा , ‘ आपके मुँह पर क्या है ? दाढ़ी है कि झाड़ी ? ‘ महात्मा ने उत्तर दिया , ‘ अब मैं इस स्थिति में हूँ कि तुझे बता सकूँ । आज मेरे मुँह पर दाढ़ी है और मैं इसको बेदाग़ और पवित्र लेकर जा रहा हूँ । ‘ वह कहने लगी , ‘ उस वक़्त क्यों नहीं बताया ? इतने साल चुप क्यों रहे ? ‘ महात्मा ने स्नेहपूर्वक कहा , ‘ बहन , मन का कुछ पता नहीं । इसका क्या भरोसा कि कब गिरा दे । इंसान को ज़िंदगी में कभी गर्व नहीं करना चाहिए ।

दुनिया में दम मारने की गुंजाइश नहीं है ।

Published by Pradeep Th

अनमोल मनुष्य जन्म और आध्यात्मिकता

Leave a comment

Design a site like this with WordPress.com
Get started