काला नूर

जो नाम लेकर रख छोड़े , उसे फ़ायदा कुछ नहीं । जिस तरह किसी कुम्हार को हीरा मिल गया , उसने गधे के गले में बाँध दिया , कद्र नहीं की ।महाराज सावन सिंह

एक मिरासी ग़लती से मसजिद में जा पहुँचा । वहाँ पाँच नमाज़ी मौजूद थे । उन्होंने कहा कि आओ , वुजू करके नमाज़ पढ़ें । मिरासी ने पूछा , ‘ नमाज़ से क्या फ़ायदा होता है ? ‘ उन्होंने जवाब दिया कि नमाज़ पढ़ने से चेहरे पर खुदा का नूर आता है । यह सुनकर मिरासी बोला , ‘ बहुत अच्छा ! अभी तो मुझे काम है , पर घर जाकर ज़रूर पढूँगा । ‘ वे पाँचों नमाज़ में लग गये और वह घर आ गया ।

जब रात के पिछले पहर में उठा तो सोचने लगा कि अगर वुजू किया तो नशा टूट जायेगा , क्योंकि उसे नशा करने की आदत थी । नमाज़ भी ज़रूर पढ़नी थी ताकि चेहरे पर ख़ुदा का नूर आ जाये , लेकिन बिना वुजू नमाज़ पढ़ना जायज़ नहीं होता । यह सोचकर उसने मिट्टी से करने का फ़ैसला किया । यह सोचकर अँधेरे में ज़मीन पर हाथ मारकर मुँह पर फेरने लगा । रात को कहीं तवा नीचे उलटा पड़ा रह गया था । हाथ तवे पर जा लगा । बड़े प्रेम से उसने वुजू करके नमाज़ पढ़ी । जब दिन निकला तो मिरासिन से पूछने लगा , ‘ देख ! क्या मेरे चेहरे पर नूर आया है ? ‘ उसने कहा , ‘ अगर नूर का रंग काला होता है , तो वह घटा बनकर आया है और अगर नूर गोरा होता है या उसका कोई और रंग होता है , तो जो पहले था वह भी जाता रहा है !

यही हाल हमारा है । हम नाम लेकर कमाई तो करते नहीं , और कहते हैं कि रूह खंडों – ब्रह्मांडों पर चढ़ जाये ।

Published by Pradeep Th

अनमोल मनुष्य जन्म और आध्यात्मिकता

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