जहाँ आसा तहाँ बासा

जब तक आकाश और पृथ्वी टल न जायें , तब तक व्यवस्था से एक मात्रा या एक बिंदु भी बिना पूरा हुए नहीं टलेगा ।सेंट मैथ्यू

कहा जाता है कि कबीर साहिब जब बाहर जाया करते थे तो एक आदमी उन्हें अकसर खेत में बैठा मिलता था । एक दिन कबीर साहिब ने उससे कहा कि ख़ाली बैठे रहते हो , परमात्मा का भजन किया कर , जिससे तुझे फ़ायदा होगा । कहने लगा कि अभी बच्चे छोटे – छोटे हैं , जवान हो जायें और अपने पैरों पर खड़े हो जायें , फिर भजन करूंगा । जब बच्चे जवान हो गये , कबीर साहिब फिर मिले और कहा कि भजन किया कर , तो बोला कि इनकी शादी हो जाये फिर भजन करूंगा । जब शादी हो गयी तब कबीर साहिब ने कहा कि अब बता ! जवाब दिया कि पोतों की खुशियाँ देख लूँ । पोते भी हुए , कबीर साहिब फिर मिले और कहा कि अब तो भजन करो । कहने लगा कि पोते छोटे – छोटे हैं , जवान हो जायें फिर भजन करूंगा । जब पोते जवान हो गये तो कबीर साहिब ने फिर पूछा । बोला , ‘ ये लापरवाह हैं । रात को सो जाते हैं , अगर मैं न जायूँ तो चोरी हो जायेगी । ‘ कुछ समय बाद कबीर साहिब फिर वहाँ से गुज़रे तो बाबा नज़र न आया । पूछा कि बाबा कहाँ है ? बेटों और पोतों ने कहा कि वह तो मर गया है ।

कबीर साहिब कहा कि बहुत अफ़सोस की बात है । बेचारे ग़रीब आदमी ने अपना सारा जीवन व्यर्थ ही गंवा दिया । यदि वह थोड़े समय के लिए भी परमात्मा की भक्ति करता तो दुनिया के जंजाल से बच जाता । फिर कबीर साहिब ने अंतर्ध्यान होकर देखा कि घर में दुधारु पशुओं के साथ उसकी बहुत मुहब्बत थी । गाय , भैंस पालता था । एक गाय के साथ उसका विशेष लगाव था । जब मरा तो उस गाय के पेट में बछड़ा बनकर आया ।

बछड़ा बड़ा होकर जब बैल बना तो उसे हल में जोत दिया गया । सारी उम्र हल में जुता रहा । आख़िर बूढ़ा हो गया । जब उनके काम का न रहा तो उन्होंने उसे गाड़ीवान को बेच दिया । उसने भी कुछ साल गाड़ी में जोता । जब उसके काम का न रहा तो उसने तेली को दे दिया , जिसने उसे काफ़ी समय कोल्हू में जोता । फिर जब उसके काम का भी न रहा तो उसने क़साई को दे दिया । क़साई ने मारकर उसका मांस बेच दिया , बाक़ी चमड़ा नकारेवाले ले गये । उन्होंने नक़्क़ारे पर मढ़ा लिया , अब खूब डंडे पड़ते हैं । यह देखकर कबीर साहिब ने कहा :

बैल बने हल में जुते , ले गाड़ी में दीन । तेली के कोल्हू रहे , पुनि घेर कसाई लीन ॥ माँस कटा बोटी बिकी , चमड़न मढ़ी नकार । कुछेक कर्म बाकी रहे , तिस पर पड़ती मार ॥

Published by Pradeep Th

अनमोल मनुष्य जन्म और आध्यात्मिकता

2 thoughts on “जहाँ आसा तहाँ बासा

Leave a comment

Design a site like this with WordPress.com
Get started