ब्रह्मचर्य के लाभ

डॉक्टर निकलसन कहते हैं कि स्त्रियों और पुरुषों में शरीर का सबसे अच्छा रक्त संतानोत्पत्ति के तत्त्वों को बनाने में खर्च होता है । एक पवित्र जीवन जीनेवाले मनुष्य में वीर्य का तत्त्व शरीर में दुबारा जज़्ब होता है और रक्त के प्रवाह में मिलकर उत्तम शारीरिक , दिली और दिमागी ताक़त को बनाता है , जिससे मनुष्य शक्तिवान बन जाता है और चौदह – चौदह , सोलह – सोलह घंटे शारीरिक काम करके भी थकता नहीं ।

अगर ब्रह्मचर्य क़ायम रहे तो हमारे लिए साधारण आहार भी काफ़ी होगा और दवाइयों का बाज़ार ठंडा पड़ जाएगा । अगर ब्रह्मचर्य को धारण किया जाए तो जीवन पवित्र हो जाएगा ; शरीर , हृदय और मस्तिष्क मज़बूत हो जाएँगे , मनुष्य दीर्घायु प्राप्त करेंगे और क्रोध और विषयों के उद्वेगों पर काबू पा सकेंगे । वे सच्चे , पवित्र , कोमल – हृदय , अहिंसक और अच्छे चाल – चलनवाले बन जाएँगे । हमारी संतान हमारी आगे आनेवाली पीढ़ी के सच्चे हीरे – जवाहरात बन जाएगी ।

सब महात्माओं की ओर से और धर्मपुस्तकों में शील को धारण करने का दृढ़ उपदेश है । शिव – संहिता ( 4:88 ) में लिखा है , “ मरणं बिन्दुपातेन जीवनं है । बिंदुधारणे । ” वीर्य की रक्षा जीवन है और वीर्य का पात मृत्यु है।

Published by Pradeep Th

अनमोल मनुष्य जन्म और आध्यात्मिकता

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