मानव जीवन का उद्देश्य

परमात्मा की प्राप्ति (संत दादू दयाल जी …….)

परमात्मा की प्राप्ति मनुष्य – जन्म में ही सम्भव है । मानव शरीर धारण करके ही हम परमात्मा के सच्चे नाम की नौका पर चढ़कर इस विशाल भवसागर को पार कर सकते हैं ।

मानव शरीर को परमात्मा का मन्दिर , नर – नारायणी देह या मुक्ति का दरवाज़ा कहा गया है । यह विरला सौभाग्य और अमूल्य अवसर बार – बार नहीं मिलता । अतः जो मानव जीवन विषय – वासना और संसार के नश्वर पदार्थों की प्राप्ति में व्यतीत हुआ , वह व्यर्थ ही चला गया । वही जीवन सार्थक है जो परमात्मा के प्रेम और भक्ति में लगा ।

परमात्मा के प्रेमी अमूल्य रूहानी हीरे संचय करते हैं और परमात्मा के मिलन – सुख का शाश्वत आनन्द उठाते हैं । किन्तु अनाड़ीजन तुच्छ विषय – वासना का कूड़ा बटोरने में अपना बहुमूल्य समय गंवाते हैं और अन्त में सिर धुन – धुनकर पछताते हैं ।

बार बार यह तन नहीं , नर नारायण देह । दादू बहुरि न पाइये , जनम अमोलिक येह ।।

दुख दरिया संसार है , सुख का सागर राम । सुख सागर चलि जाइये , दादू तजि बेकाम । ‘

( दादू ) दरिया यहु संसार है , राम नाम निज नाब । दादू ढील न कीजिये , यह अवसर यहु डाव ।।

Published by Pradeep Th

अनमोल मनुष्य जन्म और आध्यात्मिकता

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