शिष्य तैयार

जब शिष्य तैयार हो जाता है तो उसका गुरु से मिलाप हो जाता है । सच पूछो तो गुरु ऐसे शिष्य की आप ही तलाश कर लेता है।

गुरु के लिए आत्मा को ऊपर ले जाना मुश्किल नहीं , लेकिन उचित अभ्यास के बिना ऊपर ले जाने से उस आत्मा का नुकसान होता है । एक रेशमी कपड़े को , जो काँटेदार पौधों पर फैला हुआ है , अगर एकाएक खींचा जाये तो वह फटकर टुकड़े – टुकड़े हो जायेगा । उसी तरह आत्मा को , जो कर्म के काँटों में फँसी हुई है और शरीर के रोम – रोम में फैली हुई है , गुरु के प्रेम द्वारा धीरे – धीरे निर्मल करना चाहिए ।

आपकी चिंता और परेशानी गुरु की चिंता और परेशानी है । इन सब चिंताओं को गुरु के हवाले कर दीजिये और बेफ़िक्र होकर गुरु के लिए प्रेम बढ़ाइये , जो आपका फ़र्ज़ है ।

कृपया चिंता न करें । हर क़दम पर , आपकी मदद , मार्गदर्शन और रक्षा के लिए सतगुरु हमेशा आपके साथ हैं । आप उनके प्रति सचेत हो जायें और उनकी लगातार मौजूदगी का अनुभव करें । विश्वास , प्रेम और नम्रता के साथ बराबर भजन – सुमिरन करते रहें ।

Published by Pradeep Th

अनमोल मनुष्य जन्म और आध्यात्मिकता

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