
आत्माएँ तीन प्रकार की हैं , ( 1 ) नित्यमुक्त आत्माएँ – जो कभी बंधन में नहीं रही तथा सदैव परमात्मा के साथ रहती हैं । ( 2 ) मुक्त आत्माएँ – जो कभी संसार – चक्र का हिस्सा थीं , परंतु अब मुक्त होकर परमात्मा के साथ बहती हैं । ( 3 ) बद्ध आत्माएँ – जो संसार – चक्र में बँधी हैं । तीसरी प्रकार को आत्माएँ आवागमन के चक्र में तब तक फँसी रहती हैं , जब तक उन्हें मोक्ष प्राप्त नहीं हो जाता ।
रामानुज मनुष्य की भूलने की प्रवृत्ति की चर्चा करते हैं जिसके कारण वह अपनी वास्तविकता को भूल जाता है । वह इस बात को एक लघु कथा के माध्यम से समझाते हैं ।
एक छोटा – सा राजकुमार अपने महल से बाहर खेलते हुए रास्ता भूल गया और वापस महल में नहीं पहुँचा । एक दयालु व्यक्ति , जो राजकुमार के विषय में कुछ भी नहीं जानता था , उसे अपने घर ले गया और राजकुमार उसके दूसरे बच्चों के साथ उसके पुत्र की भाँति पलने लगा ।
एक दिन राजा के एक दरबारी की नज़र उस पर पड़ी तो उसने खोए हुए राजकुमार को पहचान लिया और उसे यह याद दिलाई कि महल में रहनेवाला उसका पिता उसे मिलने के लिए तड़प रहा है । इससे राजकुमार के मन में महल में बिताए दिनों की याद ताज़ा हो गई । वह ख़ुशी से झूम उठा और अपने पिता से मिलने के लिए आतुर हो गया । जब राजा को अपने खोए हुए पुत्र के मिलने का समाचार मिला तब वह स्वयं उसके के लिए आए और दोनों का मिलाप हो गया ।
कथा में इस बात को दर्शाया गया है कि जब आत्मा इस संसार की भूल – भुलैया में खो जाती है तो वह अपने दिव्य स्रोत को भूल जाती है । जब कोई पूर्ण गुरु इसे इसके वास्तविक स्वरूप की याद करवाता है तो यह वापस अपने मूलस्रोत में जाने के लिए उत्सुक हो उठती है । परमात्मा जो आत्मा के वापस आने की उत्सुकता से प्रतीक्षा कर रहा होता है , आगे बढ़कर उसका स्वागत करता है और उसे आशीर्वाद देता है ।
वाह! एक लघु कथा के द्वारा, मोक्ष मार्ग के याद दिलाएं हैं। शुक्रिया। 👍💐
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