नाम की महिमा

आप तरै जन पितरा तारे
संगत मुकत सो पार उतारे।

आप देखो, गुरु साहिब “नाम” की कितनी महिमा करते हैं। कहते हैं कि जो “नाम” की कमाई करते हैं, वे आप भी तर जाते हैं और उनके ‘पित्तरों’ को भी उनके अभ्यास से लाभ पहुँचता है। उच्च श्रेणी के भक्त के अभ्यास और भक्ति से उसके परिवार के लोग, सम्बंधी और मित्र भी लाभ उठाते हैं। जो ‘थोड़ी बहुत’ “नाम” की कमाई करते हैं उनके भी निकट संबंधियों को लाभ पहुँचता है। सो “नाम” तो “नाम” ही है। गुरु साहिब कहते हैँ कि “सन्त” आप भी तर जाते हैं, अपने “कुल” को तार लेते हैं और अपनी “संगत” को भी तार लेते हैं

Published by Pradeep Th

अनमोल मनुष्य जन्म और आध्यात्मिकता

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