भरोसा

एक व्यक्ति की नई नई शादी हुई और वो अपनी पत्नी के साथ घूम कर वापिस अपने घर आ रहे थे। रास्ते में जब दोनों को एक नदी को नाव से पार कर रहे थे, तभी अचानक एक भयंकर तूफ़ान आ गया। वो आदमी वीर था लेकिन औरत बहुत डरी हुई थी क्योंकि हालात बहुत खराब थे। नाव बहुत छोटी थी और तूफ़ान बहुत भयंकर था और दोनों किसी भी समय नदी में डूब सकते थे। लेकिन वो आदमी चुपचाप निश्चल और शान्त बैठा था जैसे कि कुछ नहीं होने वाला औरत डर के मारे कांप रही थी और वो बोली:- “क्या तुम्हें डर नहीं लग रहा, ये हमारे जीवन का आखिरी क्षण भी हो सकता है। ऐसा नहीं लगता कि हम नदी के दूसरे किनारे पर पहुंच भी पायेंगे या नहीं ? अब तो कोई चमत्कार ही हमें बचा सकता है वर्ना हमारी मौत निश्चित है। क्या तुम्हें बिल्कुल डर नहीं लग रहा ? कहीं तुम पागल या पत्थर के तो नहीं बने हो ?”

वो आदमी खूब हँसा और एकाएक उसने म्यान से तलवार निकाल ली? औरत अब और परेशान हो गई कि यह कर क्या रहा है? तब वो उस नंगी तलवार को औरत की गर्दन के पास ले आया, इतना पास कि उसकी गर्दन और तलवार के बीच बिल्कुल मामूली फर्क रह गया था क्योंकि तलवार लगभग उसकी गर्दन को छू रही थी। वो अपनी पत्नी से बोला:- “क्या तुम्हें डर लग रहा है”?

अब पत्नी खूब हँसी और बोली:- “जब तलवार तुम्हारे हाथ में है तो मुझे किस बात का डर, क्यूँ कि मैं जानती हूं कि तुम मुझे बहुत प्यार करते हो !”

उसने तलवार वापिस म्यान में डाल दी और बोला कि :- यही मेरा जवाब है! मैं भी जानता हूं कि मेरे सतगुरु मुझे बहुत प्यार करते हैं और ये तूफ़ान भी उनकी मर्जी के बिना नहीं आया। इसलिए जो भी होगा अच्छा ही होगा। अगर हम बच गये तो भी और अगर नहीं बचे तो भी, क्योंकि सब कुछ उस मालिक के हाथ में है और वो कभी भी कुछ भी गलत नहीं कर सकता। वो जो भी करेंगे हमारे भले के लिए करेंगे।

एक सत्संगी को हमेशा अपने सतगुरु पर हर हालत में भरोसा रखना चाहिये और यह भरोसा हमारे पूरे जीवन को बदल सकता है। लेकिन भरोसा करनी में (भजन सुमिरन) जाहिर करना है बातों से नहीं

Published by Pradeep Th

अनमोल मनुष्य जन्म और आध्यात्मिकता

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