सूफी संत

शम्स तब्रेज के कलाम में आता है : यदि तू रब्ब का दीदार करना चाहता है तो उन ( संतो ) के चरणों की धूलि को अपनी आंखों का सुरमा बना क्योंकि उनमें जन्म से अंधे को भी आंखें दे सकने की सामर्थ्य है । अंधों से आपका भाव ऐसे लोगों से हैं जिनको सर्वव्यापकContinue reading “सूफी संत”

संगति

जीव पर संगति का गहरा प्रभाव पड़ता है। हम अच्छे लोगो की संगति में अच्छे और बुरे लोगो की संगति में बुरे बन जाते है। व्यावहारिक जीवन में देखते है कि अगर हम चोरों, नशा करने वालो, जुवारियो आदि की संगति में रहते है, तो हमारे अंदर भी वैसे संस्कार और वैसी आदते पैदा होContinue reading “संगति”

कीर्तन, राग- नाद (Divine Music)

आदि ग्रंथ में दर्ज वाणी को अलग अलग रागों के अनुसार गाने की हिदायत की गई है। जब वाणी का गायन किया जाता है तो वाणी की पूरी समझ न भी आए, तब भी उस कीर्तन से मन को शांति मिलती है और ध्यान उस परमेश्वर की तरफ जाता है, जिसकी महिमा में कीर्तन कियाContinue reading “कीर्तन, राग- नाद (Divine Music)”

काल- भाग 2( Negetive Power)

आत्मा अब तक काल के देश से निकलकर सतलोक नहीं जा सकी, इसका कारण कल नहीं, बल्कि हमारे खुद के किए हुए कर्म ही है। काल तो उस परमात्मा का हुक्म मानकर, रचना के नियमो के अनुसार हमारे किए हुए कर्मो का ही फल हमे दे रहा है। वह तो परमात्मा का सच्चा सेवक हैContinue reading “काल- भाग 2( Negetive Power)”

काल – भाग 1 (Negetive power)।

आत्मा परमात्मा की अंश है इसके अंदर अपने मूल के प्रति कुदरती कशिश है, पर इस मृत्यु लोक में कुछ ऐसी शक्तियां भी है जो जीवात्मा को रचना के प्रेम में फसाकर परमात्मा से मिलाप के रास्ते में रुकावटें पैदा करती है। इन शक्तियों को काल, मन और माया का देश कहा जाता है। संसारContinue reading “काल – भाग 1 (Negetive power)।”

कर्म सिद्धांत भाग-2

कर्मो को आम तौर पर पुण्यो और पापो में बांटा जाता है। मन, वचन और कर्म के द्वारा किसी को सुख देना पुण्य है और मन,वचन और कर्म द्वारा किसी को दुख देना पाप है। मगर पुण्य कभी भी पापो का नाश नहीं कर सकते। पुण्य, पुन्यो के और पाप, पापो के लेखे में जमाContinue reading “कर्म सिद्धांत भाग-2”

Quote of the Day 24.07.20

Quote of the Day“Love is the master key which opens the gates of happiness.”— Oliver Wendell Holmes — हर ख़ुशी की चाभी प्यार है। प्यार में ऐसी जादूगरी है कि उससे हर खुशी मिल सकती है पर शर्त है बिना स्वार्थ का प्यार हो। जिसमे सिर्फ देने की 100% कोशिश हो ,पर पाने की तम्मना ना हो।

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