जनम जनम की इस मन कउ मल लागी काला होआ सिआह ॥ खंनली धोती उजली न होवई जे सउ धोवण पाह।।14 गुरु अमरदास पराशर जी सारी उम्र योगाभ्यास में रहे । पूर्ण योगी होकर घर को वापस आ रहे थे । रास्ते में एक नदी पड़ती थी । जब वहाँ आये तो मल्लाह से कहाContinue reading “व्यर्थ गयी कमाई”
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बरतन को टकोरना
सील गहनि सब की सहनि , कहनि हीय मुख राम । तुलसी रहिए एहि रहनि , संत जनन को काम ॥ गोस्वामी तुलसीदास दादू जी एक कामिल फ़क़ीर हुए हैं । उनका जन्म मुसलमान परिवार में हुआ था । एक बार दो पंडित आपके पास इस ग़रज़ से आये कि चलकर सत्संग सुनें और गुरुContinue reading “बरतन को टकोरना”
नदी पार करने का मंत्र
यदि तुमको राई के दाने के बराबर भी विश्वास होता , तो तुम इस शहतूत के पेड़ से अगर कहते कि जड़ से उखड़कर समुद्र में लग जा , तो वह तुम्हारी मान लेता ।80 सेंट ल्यूक एक बार का ज़िक्र है , एक स्त्री किसी महापुरुष की सेवा किया करती थी । महात्मा काContinue reading “नदी पार करने का मंत्र”
आदमी का उस्ताद आदमी
अंतर में सतगुरु से संपर्क बना रहने पर ही नाम का प्यार गिला जाग्रत होता है । दुनियादारों की संगति से हमारी सुरत फिर इंद्रियों में आ गिरती है । इसलिए गुरु की संगति या सत्संग परम आवश्यक है । गुरु के प्यार से हमें जगत का मोह छोड़ने और अंदर जाने की शक्ति प्राप्तContinue reading “आदमी का उस्ताद आदमी”
भाई सुथरा और महात्मा की आग
– क्रोध में रूह फैलती है । जब क्रोध करो , आँखें लाल सुर्ख हो जाती हैं । रोम – रोम खड़ा हो जाता है , चेहरा और ही हो जाता है । यहाँ तक कि आदमी अक्ल से बेबहरा हो जाता है यानी संतुलन खो बैठता है । महाराज सावन सिंह गुरु अर्जुन साहिबContinue reading “भाई सुथरा और महात्मा की आग”
आग का मोल
अखी काढ धरी चरणा तल सभ धरती फिर मत पाई।।गुरु रामदास हटाता , वेश्या और छेड़ती । कहा जाता है कि शेख़ फ़रीद का एक शिष्य बहुत नेक – पाक था । जब वह बाज़ार जाता तो एक वेश्या उसका ध्यान अपनी ओर खींचने के लिए उससे मज़ाक़ किया करती । वह बेचारा दूसरी ओरContinue reading “आग का मोल”
भेड़ों में शेर का बच्चा
रूहानी विज्ञान का उद्देश्य यही है कि मनुष्य माया के परदों से मुक्त होकर स्वयं को पहचान ले कि वह आत्मा है जो स्वयं चेतन है और महाचेतन के समुद्र का अंश है , ताकि वह उस महाचेतन सागर में मिल जाये …। महाराज सावन सिंह एक बार एक शेरनी बच्चे को जन्म देकर शिकारContinue reading “भेड़ों में शेर का बच्चा”
शरण का प्रताप
गुरु बिन तेरा और न कोई । धार बचन यह मन में ॥ स्वामी जी महाराज भागवत में एक कथा आती है कि एक बीमार और कमज़ोर बकरी अपने घर से भटककर दूर किसी घने जंगल में चली गयी । ख़तरे भरे इतने विशाल और घने जंगल में उस का बचाव करनेवाला कोई नहीं थाContinue reading “शरण का प्रताप”
धृतराष्ट्र का अंधा होना
जीव अपने सब सुख – दुःख प्रारब्ध कर्मों के अनुसार पाता है और मनुष्य जैसे भले – बुरे कर्म करता है , उनके अनुसार वैसे ही ऊँची – नीची योनियाँ भोगता है । महाराज सावन सिंह एक बार धृतराष्ट्र ने भगवान कृष्ण से पूछा कि मैं अंधा क्यों हूँ । मुझे पिछले सौ जन्मों कीContinue reading “धृतराष्ट्र का अंधा होना”
फ़क़ीर और चींटियाँ
जिस दिल में सब जीवों के लिए प्रेम और दया होती है , उसमें विषय – विकारों के लिए कोई स्थान नहीं होता । ऐ दोस्त ! कभी किसी दिल को ठेस न पहुँचाना । किसी का दिल दुखाना प्रभु को भूल जाना है ।अन्सारी ऑफ़ हैरात ‘ तज़करात – उल – औलिया ‘ मुसलमानोंContinue reading “फ़क़ीर और चींटियाँ”