कर्म सिद्धांत भाग-2

कर्मो को आम तौर पर पुण्यो और पापो में बांटा जाता है। मन, वचन और कर्म के द्वारा किसी को सुख देना पुण्य है और मन,वचन और कर्म द्वारा किसी को दुख देना पाप है। मगर पुण्य कभी भी पापो का नाश नहीं कर सकते। पुण्य, पुन्यो के और पाप, पापो के लेखे में जमाContinue reading “कर्म सिद्धांत भाग-2”

Quote of the Day 24.07.20

Quote of the Day“Love is the master key which opens the gates of happiness.”— Oliver Wendell Holmes — हर ख़ुशी की चाभी प्यार है। प्यार में ऐसी जादूगरी है कि उससे हर खुशी मिल सकती है पर शर्त है बिना स्वार्थ का प्यार हो। जिसमे सिर्फ देने की 100% कोशिश हो ,पर पाने की तम्मना ना हो।

कर्म सिद्धांत भाग-1

संसार में सभी संतो ने कर्मो और फल के सिद्धांत को बताया है। संतो महात्माओं ने संसार को कर्म भूमि या “करमा संदडा खेत” (गुरु नानक देव जी , आदि ग्रंथ पृष्ठ स १३४ में कहा है।) तुलसी दास, रामचरितमानस (२:२१८:२) में उन्होंने कहा है: “करम प्रधान बिस्व कर राखा। जो जस करई सो तसContinue reading “कर्म सिद्धांत भाग-1”

एक के लिए एक ही रास्ता

संत महात्मा हमे उपदेश करते है कि परमेश्वर प्राप्ति का साधन और मार्ग मनुष्य द्वारा बनाया हुआ नहीं, परमात्मा द्वारा ही बनाया गया है। आदि ग्रंथ पृष्ठ स ११२२ पर गुरु अर्जुन देव जी फरमाते है : “मारग प्रभ का हरि किया संतन संग जाता।।” यह साधन और मार्ग एक, अनादि और सर्वसांझा है। इसमेंContinue reading “एक के लिए एक ही रास्ता”

ऋद्धि- सिद्धि और करामात

पिंड के छः चक्रों की साधना, योग – अभ्यास, कुण्डलिनी जगाने, प्राणायाम आदि द्वारा अभ्यासी को ऋद्दिया सिध्दियां और करामाते हासिल हो जाती है, जिनसे वह अलौकिक कार्य भी कर सकता है। संत महात्मा समझाते है कि ऋद्दिया सिध्दियां और करामाते मन माया का खेल है। यह काल द्वारा आत्मा को संसार में फसाए रखनेContinue reading “ऋद्धि- सिद्धि और करामात”

इच्छाएं- तृष्णाए

संतमत के अनुसार इच्छाएं तृष्णाएं ही हमारे बंधन का वास्तविक कारण है। सागर की लहरों की भांति इच्छाएं तृष्णाएं हमारे मन में रोज नई तरंगे पैदा करती रहती है। सारा संसार इनके चक्र में फसकर दिन रात माया के धंधों में लगा रहता है। हम इन इच्छाएं तृष्णाएं के अधीन होकर किए गए कर्मो केContinue reading “इच्छाएं- तृष्णाए”

आत्मा क्या है?

संत महात्मा हमे बताते है कि हमारी हस्ती का आधार मन इन्द्रियां या शरीर नहीं, आत्मा है। मन, इन्द्रियां जड़ और नाशवान है, पर आत्मा उस कर्ता पुरुष का अंश होने के कारण उसकी तरह ही चेतन, अमर, अविनाशी और अजन्मी है। कह कबीर इहू राम की अंस । ( कबीर साहिब, आदि ग्रंथ पृष्ठContinue reading “आत्मा क्या है?”

जीवन की सच्चाई

ये जीवन चार दिनों का मेला है। चार दिन का मतलब बचपन, किशोरावस्था, जवानी और बुढापा। ये जीवन की चार अवस्थाएं है जिन्हे संतो ने चार दिन भी कहा है। यह संसार की सारी चीजे झूठी है सिर्फ परमात्मा सत्य है। क्यो कि सबको एक दिन नाश हो जाना है। आदि ग्रंथ के पृष्ठ सContinue reading “जीवन की सच्चाई”

अहिंसा, दया- भाव

संत महात्माओं ने सच्चे परमार्थ के दो अंग बताएं है, पहला अंतर मुख अभ्यास और दूसरा बाहरी रहनी करनी। बाहरी रहनी करी में संतो ने पांच विषय विकारों काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार को छोड़कर उनकी जगह शील, क्षमा, संतोष, विवेक और नम्रता आदि गुण धारण करने पर बल दिया है। जब तक हमContinue reading “अहिंसा, दया- भाव”

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