“परमार्थी साखी” ये बात उन दिनों की है जब बाबा जैमल सिंह जी ने महाराज सावन सिंह जी को अपनी गुरु गद्दी सौपने का निर्णय कर लिया था। उस दिन बाबा जैमल सिंह ने महाराज सावन सिंह जी से कहा कि – जी मेरे लिए अकाल पुरुष का हुकुम आ चूका है अब मेरे बादContinue reading “गुरु की मौज”