आत्मा की विनती और पुकार

*करू बेनती दऊ कर जोरी अरज सुनो राधास्वामी मोरीस्वामीजी यहा पर आत्मा की पुकार का इस बेनती के जरीये वर्णन कर रहे है यह प्रार्थना आत्मा अपने पती रूपी परमात्मा से यहा पर कर रही है , हे सच्चे पातशाहा मै दोनो हाथ जोडकर तुम्हारे सामने अरदास कर रही हू आप मेरी अरदास स्वीकार करContinue reading “आत्मा की विनती और पुकार”

पूर्ण गुरु परमात्मा का ही रूप है

संसार की चौरासी लाख योनियों का सिरजन होते हुए भी मनुष्य की कुछ अपनी मजबूरियां है। अगर मनुष्य को कुछ बताना या समझाना हो तो वह उससे ही समझ सकेगा जो उसी जैसा होकर उससे बात करे। सिरजनहार प्रभु जब अपनी दया मेहर के कारण अपनी पैदा की हुईं विशेष आत्माओं का उद्धार करना चाहताContinue reading “पूर्ण गुरु परमात्मा का ही रूप है”

परमात्मा तक पहुंचने की कुंजी या सीढ़ी-1

परमेश्वर तक पहुंचना कोई हंसी मजाक की बात नहीं।वह तो मानो किसी मजबूत किले में बैठा हुआ है और वह क़िला है मोटी पथरीली दीवारों और वज्र के मजबूत कपाटोवला। न दीवारे ढह सकती है, न कपाट ही टूटते है।इसलिए उसके अंदर जाने के लिए कोई उपाय नहीं बनता। हां, अगर एक सीढ़ी मिल जाए,Continue reading “परमात्मा तक पहुंचने की कुंजी या सीढ़ी-1”

संत दरिया मारवाड़ वाले -16

मुरली कौन बजावै हो , गगन मँडल के बीच ॥ त्रिकुटी संगम होय कर , गंग जमुन के घाट । या मुरली के सब्द से , सहज रचा बैराट । गंग जमुन बिच मुरली बाजै , उत्तर दिस धुन होय। त उन मुरली की टेरहि सुनि सुनि , रहीं गोपिका मोहि ॥ जहँ अधर डालीContinue reading “संत दरिया मारवाड़ वाले -16”

मनुष्य जन्म- एक अवसर part 3

कबीर साहिब हमारी पूरी अवस्था अपनी बानी के जरिए बयान कर रहे है जब लग तेल दीवे मुख बाती तब सुझे सभ कोई।। तेल जले बाती ठहरानी सुन्ना मंदर होई।। रे बावरे तुह घरी न राखै कोई।। तू राम नाम जप सोई।। का की मात पिता कहूं का को कवन पुरख की जोई।। घट फूटेContinue reading “मनुष्य जन्म- एक अवसर part 3”

मनुष्य जन्म: एक अवसर part-2

आगरा के महान संत स्वामी जी महाराज अपनी बानी में फरमाते है: “नर देही तुम दुर्लभ पाई। अस औसर फिर मिले न आय।। “आप मनुष्य जन्म की महत्ता के बार में बता रहे है कि ऐसा दुर्लभ मौका हमें मिला है, फिर ऐसा मौका मिले या ना मिले , इसीलिए इसका हम फायदा उठाना है।Continue reading “मनुष्य जन्म: एक अवसर part-2”

परमात्मा की भक्ति के पांच सिद्धांत

परमात्मा की भक्ति के पांच सिद्धांतभगवान की सच्ची भक्ति विकसित करने के लिए मार्गदर्शन करने के लिए ” भक्ति के पांच सिद्धांत” है। ये सिद्धांत स्पष्ट करते है कि ईश्वर के भक्त है को दुनिया को दूसरी दृष्टि के अनुसार देखने आते है, ईश्वर के प्रेम, दया और अनुग्रह के साथ। आइए एक एक करकेContinue reading “परमात्मा की भक्ति के पांच सिद्धांत”

जीवन में सात गुरु ( seven masters)

कबीर , गुरु – गुरु में भेद है , गुरु – गुरु में भाव । सोइ गुरु नित बन्दिये , शब्द बतावे दाव ॥ ( १ ) प्रथम गुरू है पिता और माता। जो है रक्त बीज के दाता ॥ ( पहला गुरू है पिता और माता) ( २ ) दुजा गुरू है भाई वContinue reading “जीवन में सात गुरु ( seven masters)”

जीते जी मरना…

कबीर साहिब इस बारे में फरमाते है:(आदि ग्रंथ पृष्ठ स 1365) कबीर जिस मरने ते जग डरे मेरे मन आनंद।। गुरु नानक देव जी(आदि ग्रंथ पृष्ठ स 730) फरमाते है: नानक जीवतिया मर रहीए ऐसा जोग कमाइए।। बाइबल में सेंट पाल (बाइबल 15:31) भी कहते है “मै प्रतिदिन मरता हूं।“ अहले इस्लाम की हदीस (अहिदिसेContinue reading “जीते जी मरना…”

सही सोच की ओर….

स्वामी विवेकानंद ने कहा है: “संसार का सबसे महान विजेता भी जब अपने मन को वश में करने की कोशिश करता है तो अपने आप को एक बच्चे की तरह असमर्थ पाता है। उसे इस मन रूपी संसार पर विजय प्राप्त करनी है – जो इस संसार से बड़ा है तथा जिसे जीतना और भीContinue reading “सही सोच की ओर….”

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