नाम की महिमा

आप तरै जन पितरा तारेसंगत मुकत सो पार उतारे। आप देखो, गुरु साहिब “नाम” की कितनी महिमा करते हैं। कहते हैं कि जो “नाम” की कमाई करते हैं, वे आप भी तर जाते हैं और उनके ‘पित्तरों’ को भी उनके अभ्यास से लाभ पहुँचता है। उच्च श्रेणी के भक्त के अभ्यास और भक्ति से उसकेContinue reading “नाम की महिमा”

चार राम

जग में चारों राम हैं , तीन राम व्यवहार । एक्कारमा चौथा राम निज सार है , ताका करो विचार ॥ एक राम दशरथ घर डोलै , एक राम घट घट में बोले । एक राम का सकल पसारा , एक राम त्रिभुवन ते न्यारा ॥ कबीर समग्र , भाग 1 , पृ .462 एकContinue reading “चार राम”

Design a site like this with WordPress.com
Get started