बकरा और बंदर

मन लज़्ज़त का आशिक़ है , जब इसे पहले से कोई अच्छी चीज़ मिल जाये तो यह पहली को छोड़ देगा , दूसरी के पीछे दौड़ेगा । इसे दुनिया की करोड़ों लज़्ज़तें दें , मन वश में नहीं आता । महाराज सावन सिंह एक बार सत्संग के दौरान एक आदमी ने खड़े होकर बड़े महाराजContinue reading “बकरा और बंदर”

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