परमात्मा किस रूप में मौजूद है: नाम या शब्द

नाम का सौदा धन कमाने के लिए व्यापारी व्यापार करता है और व्यापार करने के लिए उसे पूंजी की आवश्यकता होती है।वह पूंजी किसी सगे संबधियों से मिलती है, इससे वह माल खरीदकर बेचता है, लाभ कमात है और धनवान होता चला जाता है। परमार्थ की पूंजी नाम है और उसे देने वाले स्नेही संबधीContinue reading “परमात्मा किस रूप में मौजूद है: नाम या शब्द”

पूर्ण सतगुरु की पहचान

पूर्ण संतो ने सावधान किया है कि गुरु होना ही काफी नहीं, गुरु पूर्ण होना चाहिए। पूरा गुरु वह है जो अपनी आत्मा परमात्मा में अभेद करके उसका रूप हो चुका हो । आदि ग्रंथ पृष्ठ स 286 में गुरु अर्जुन देव जी कहते है:सत पुरख जिन जानिया, सतिगुर तिस का नाउ।।तिस कै संग सिखContinue reading “पूर्ण सतगुरु की पहचान”

पूर्ण सतगुरु की आवश्यकता

गुरु के मिलने के बहुत लाभ है। यहां जितनी बार भी गुरु या सतगुरु के बारे कहा गया है इसका तात्पर्य वक्त के पूर्ण गुरु या सतगुरु से ही है।सच तो यह है कि उसके बिना जीवात्मा का कुछ नहीं बनता। प्रभु जब किसी को भक्ति की दात बक्शता है तो गुरु के जरिए ही बक्शताContinue reading “पूर्ण सतगुरु की आवश्यकता”

पूर्ण गुरु परमात्मा का ही रूप है

संसार की चौरासी लाख योनियों का सिरजन होते हुए भी मनुष्य की कुछ अपनी मजबूरियां है। अगर मनुष्य को कुछ बताना या समझाना हो तो वह उससे ही समझ सकेगा जो उसी जैसा होकर उससे बात करे। सिरजनहार प्रभु जब अपनी दया मेहर के कारण अपनी पैदा की हुईं विशेष आत्माओं का उद्धार करना चाहताContinue reading “पूर्ण गुरु परमात्मा का ही रूप है”

मनुष्य जन्म: एक अवसर part-2

आगरा के महान संत स्वामी जी महाराज अपनी बानी में फरमाते है: “नर देही तुम दुर्लभ पाई। अस औसर फिर मिले न आय।। “आप मनुष्य जन्म की महत्ता के बार में बता रहे है कि ऐसा दुर्लभ मौका हमें मिला है, फिर ऐसा मौका मिले या ना मिले , इसीलिए इसका हम फायदा उठाना है।Continue reading “मनुष्य जन्म: एक अवसर part-2”

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