मुरली कौन बजावै हो , गगन मँडल के बीच ॥ त्रिकुटी संगम होय कर , गंग जमुन के घाट । या मुरली के सब्द से , सहज रचा बैराट । गंग जमुन बिच मुरली बाजै , उत्तर दिस धुन होय। त उन मुरली की टेरहि सुनि सुनि , रहीं गोपिका मोहि ॥ जहँ अधर डालीContinue reading “संत दरिया मारवाड़ वाले -16”
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जीते जी मरना…
कबीर साहिब इस बारे में फरमाते है:(आदि ग्रंथ पृष्ठ स 1365) कबीर जिस मरने ते जग डरे मेरे मन आनंद।। गुरु नानक देव जी(आदि ग्रंथ पृष्ठ स 730) फरमाते है: नानक जीवतिया मर रहीए ऐसा जोग कमाइए।। बाइबल में सेंट पाल (बाइबल 15:31) भी कहते है “मै प्रतिदिन मरता हूं।“ अहले इस्लाम की हदीस (अहिदिसेContinue reading “जीते जी मरना…”
असली मंदिर और मस्जिद
हर मंदर एह सरीर है, गियान रतन प्रगट होई।। (आदि ग्रंथ पृष्ठ स 1346) हमारा शरीर ही मालिक के रहने का असली हरि मंदिर है और उस मालिक का असली ज्ञान उसी के अंदर से प्राप्त हो सकता है तुलसी साहिब हाथरस वाले फरमाते है (संत बानी पृष्ठ स ४४) नकली मंदिर मस्जिदों में जायContinue reading “असली मंदिर और मस्जिद”
नाम या शब्द : संक्षेप में (divine power)
संक्षेप में शब्द ( धुनात्मक नाम) से मतलब अनाहत या अनहद शब्द है, वह शब्द जो प्रभु का पैदा किया हुआ है और जो बिना किसी साज, यंत्र आदि की सहायता के दिन रात निरंतर हर एक के अंदर हो रहा है। इस शब्द में – जो सतपुरूष का अपना ही विस्तार है – ध्वनिContinue reading “नाम या शब्द : संक्षेप में (divine power)”
पूर्ण सतगुरु की आवश्यकता
गुरु के मिलने के बहुत लाभ है। यहां जितनी बार भी गुरु या सतगुरु के बारे कहा गया है इसका तात्पर्य वक्त के पूर्ण गुरु या सतगुरु से ही है।सच तो यह है कि उसके बिना जीवात्मा का कुछ नहीं बनता। प्रभु जब किसी को भक्ति की दात बक्शता है तो गुरु के जरिए ही बक्शताContinue reading “पूर्ण सतगुरु की आवश्यकता”