संत हमेशा से हमे रिश्तों की असलियत समझाते है, ताकि हम इनके मोह में फसकर संसार में आने के अपने असल उद्देश्य को न भुला दे। आदि ग्रंथ (पृष्ठ स 700) पर गुरु अर्जुनदेव जी फरमाते है कोई जाने कवन ईहा जग मीत।। जिस होई कृपाल सोई बिधि बुझे ता की निर्मल रीति।। मात पिताContinue reading “कौन है मेरा रिश्तेदार या मित्र?”
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नाम या शब्द (divine power)
नाम- भाग 1 अगर कोई नदी पार करनी हो तो यात्री मल्लाह की शरण लेता है और मल्लाह उसे अपनी नाव में बिठा लेता है। जीवात्मा के खेवट – सतगुरू के बारे में विचार किया जा चुका है। अब एक दृष्टि उसकी नाव – “नाम “- पर भी डाल ली जाए।संत्मत या गुरूमत को नाम मार्गContinue reading “नाम या शब्द (divine power)”