– क्रोध में रूह फैलती है । जब क्रोध करो , आँखें लाल सुर्ख हो जाती हैं । रोम – रोम खड़ा हो जाता है , चेहरा और ही हो जाता है । यहाँ तक कि आदमी अक्ल से बेबहरा हो जाता है यानी संतुलन खो बैठता है । महाराज सावन सिंह गुरु अर्जुन साहिबContinue reading “भाई सुथरा और महात्मा की आग”