मनुष्य जन्म- एक अवसर part 3

कबीर साहिब हमारी पूरी अवस्था अपनी बानी के जरिए बयान कर रहे है जब लग तेल दीवे मुख बाती तब सुझे सभ कोई।। तेल जले बाती ठहरानी सुन्ना मंदर होई।। रे बावरे तुह घरी न राखै कोई।। तू राम नाम जप सोई।। का की मात पिता कहूं का को कवन पुरख की जोई।। घट फूटेContinue reading “मनुष्य जन्म- एक अवसर part 3”

मनुष्य जन्म: एक अवसर part-2

आगरा के महान संत स्वामी जी महाराज अपनी बानी में फरमाते है: “नर देही तुम दुर्लभ पाई। अस औसर फिर मिले न आय।। “आप मनुष्य जन्म की महत्ता के बार में बता रहे है कि ऐसा दुर्लभ मौका हमें मिला है, फिर ऐसा मौका मिले या ना मिले , इसीलिए इसका हम फायदा उठाना है।Continue reading “मनुष्य जन्म: एक अवसर part-2”

मन की मौत

भजन सिमरन (meditation) मन की मौत है।मन तुम्हे सिमरन  करने से बचाएगा। वह हजार बहाने खोजेगा। वह कहेगा कि इतनी सुबह, इतनी सर्द सुबह, कहां उठ कर जा रहे हो? थोड़ा विश्राम कर लो। रात भर वेसे तो नींद नहीं आई, और अब सुबह से भजन सिमरन ? वेसे तो थके हो, अब और थकContinue reading “मन की मौत”

मनुष्य जन्म- एक अवसर part 1

मनुष्य जन्म- एक अवसर part 1 आदि ग्रंथ मे पृष्ठ सं 1075  गुरु अर्जुन देव जी फरमाते है: “लाख चौरासी जोन सबाई।। मानस को प्रभ दी वड आई।।इस पौड़ी ते जो नर चुंके, सो आई जाइ दुख पाईदा।।” इन्सान को  दूसरे जीवों के मुकाबले श्रेष्ठ बुद्धि इसीलिए मिली है कि वह इस चरण में अपनीContinue reading “मनुष्य जन्म- एक अवसर part 1”

परमात्मा की खोज में

परमात्मा की खोज हर एक महात्मा हम यही उपदेश देता है कि जब तक हमारी आत्मा अपने असल में जाकर नहीं समाती, तब तक इसका जन्म मरण के दुखो से छुटकारा नहीं हो सकता। इसीलिए हर एक को परमात्मा की खोज है। हम सब दुनिया के जीव अपनी अपनी अक्ल के अनुसार हजारों स्थानों परContinue reading “परमात्मा की खोज में”

अहंकार (हउमे) की रुकावट

हमारे मन में कुदरती ही यह विचार आता है कि अगर परमात्मा हर एक के अंदर है तो हमे अपने अंदर नजर क्यो नही आता? हमारे अंदर किस चीज की रुकावट है? वह रुकावट किस प्रकार दूर हो सकती है? गुरु अर्जुन देव फरमाते है: अंतर अलख न जाई लखया, विच परदा हउमे पाई।। अंतरContinue reading “अहंकार (हउमे) की रुकावट”

जीवन में सात गुरु ( seven masters)

कबीर , गुरु – गुरु में भेद है , गुरु – गुरु में भाव । सोइ गुरु नित बन्दिये , शब्द बतावे दाव ॥ ( १ ) प्रथम गुरू है पिता और माता। जो है रक्त बीज के दाता ॥ ( पहला गुरू है पिता और माता) ( २ ) दुजा गुरू है भाई वContinue reading “जीवन में सात गुरु ( seven masters)”

सही सोच की ओर….

स्वामी विवेकानंद ने कहा है: “संसार का सबसे महान विजेता भी जब अपने मन को वश में करने की कोशिश करता है तो अपने आप को एक बच्चे की तरह असमर्थ पाता है। उसे इस मन रूपी संसार पर विजय प्राप्त करनी है – जो इस संसार से बड़ा है तथा जिसे जीतना और भीContinue reading “सही सोच की ओर….”

पाठ आध्यात्म की नजर से

अक्सर देखने को मिलता है कि साधारण व्यक्ति ही नहीं, ग्रंथो शास्त्रों के ज्ञाता, महान विद्वान और प्रवक्ता भी इन शास्त्रों की खूब जोर शोर से व्याख्या करते है, परन्तु उनका अपना जीवन शास्त्रों में दिए उपदेश से बिल्कुल उलट होता है। संतो महात्माओं ने इस प्रकार के पाठ विचार करने वालों को चंड़ुल पक्षीContinue reading “पाठ आध्यात्म की नजर से”

निंदा आध्यात्म की नजर से..

गुरु अर्जुन देव जी (आदि ग्रंथ पृष्ठ स ३१५) फरमाते है: अवखध सभे कितीअन, निंदक का दारू नाहि ।। सब किए की माफ़ी है पर निंदा रूपी अपराध की माफ़ी बहुत मुश्किल है। संत मत में रूहानी तरक्की के लिए अवगुणों का त्याग करने और गुणों को धारण करने का उपदेश दिया जाता है। परमार्थीContinue reading “निंदा आध्यात्म की नजर से..”

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