पूर्ण संतो ने सावधान किया है कि गुरु होना ही काफी नहीं, गुरु पूर्ण होना चाहिए। पूरा गुरु वह है जो अपनी आत्मा परमात्मा में अभेद करके उसका रूप हो चुका हो । आदि ग्रंथ पृष्ठ स 286 में गुरु अर्जुन देव जी कहते है:सत पुरख जिन जानिया, सतिगुर तिस का नाउ।।तिस कै संग सिखContinue reading “पूर्ण सतगुरु की पहचान”
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पूर्ण गुरु परमात्मा का ही रूप है
संसार की चौरासी लाख योनियों का सिरजन होते हुए भी मनुष्य की कुछ अपनी मजबूरियां है। अगर मनुष्य को कुछ बताना या समझाना हो तो वह उससे ही समझ सकेगा जो उसी जैसा होकर उससे बात करे। सिरजनहार प्रभु जब अपनी दया मेहर के कारण अपनी पैदा की हुईं विशेष आत्माओं का उद्धार करना चाहताContinue reading “पूर्ण गुरु परमात्मा का ही रूप है”