नाम- भाग 1 अगर कोई नदी पार करनी हो तो यात्री मल्लाह की शरण लेता है और मल्लाह उसे अपनी नाव में बिठा लेता है। जीवात्मा के खेवट – सतगुरू के बारे में विचार किया जा चुका है। अब एक दृष्टि उसकी नाव – “नाम “- पर भी डाल ली जाए।संत्मत या गुरूमत को नाम मार्गContinue reading “नाम या शब्द (divine power)”
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परमात्मा किस रूप में मौजूद है: नाम या शब्द
नाम का सौदा धन कमाने के लिए व्यापारी व्यापार करता है और व्यापार करने के लिए उसे पूंजी की आवश्यकता होती है।वह पूंजी किसी सगे संबधियों से मिलती है, इससे वह माल खरीदकर बेचता है, लाभ कमात है और धनवान होता चला जाता है। परमार्थ की पूंजी नाम है और उसे देने वाले स्नेही संबधीContinue reading “परमात्मा किस रूप में मौजूद है: नाम या शब्द”
पूर्ण सतगुरु की पहचान
पूर्ण संतो ने सावधान किया है कि गुरु होना ही काफी नहीं, गुरु पूर्ण होना चाहिए। पूरा गुरु वह है जो अपनी आत्मा परमात्मा में अभेद करके उसका रूप हो चुका हो । आदि ग्रंथ पृष्ठ स 286 में गुरु अर्जुन देव जी कहते है:सत पुरख जिन जानिया, सतिगुर तिस का नाउ।।तिस कै संग सिखContinue reading “पूर्ण सतगुरु की पहचान”
पूर्ण सतगुरु की आवश्यकता
गुरु के मिलने के बहुत लाभ है। यहां जितनी बार भी गुरु या सतगुरु के बारे कहा गया है इसका तात्पर्य वक्त के पूर्ण गुरु या सतगुरु से ही है।सच तो यह है कि उसके बिना जीवात्मा का कुछ नहीं बनता। प्रभु जब किसी को भक्ति की दात बक्शता है तो गुरु के जरिए ही बक्शताContinue reading “पूर्ण सतगुरु की आवश्यकता”
परमात्मा तक पहुंचने की कुंजी या सीढ़ी-1
परमेश्वर तक पहुंचना कोई हंसी मजाक की बात नहीं।वह तो मानो किसी मजबूत किले में बैठा हुआ है और वह क़िला है मोटी पथरीली दीवारों और वज्र के मजबूत कपाटोवला। न दीवारे ढह सकती है, न कपाट ही टूटते है।इसलिए उसके अंदर जाने के लिए कोई उपाय नहीं बनता। हां, अगर एक सीढ़ी मिल जाए,Continue reading “परमात्मा तक पहुंचने की कुंजी या सीढ़ी-1”
मनुष्य जन्म- एक अवसर part 3
कबीर साहिब हमारी पूरी अवस्था अपनी बानी के जरिए बयान कर रहे है जब लग तेल दीवे मुख बाती तब सुझे सभ कोई।। तेल जले बाती ठहरानी सुन्ना मंदर होई।। रे बावरे तुह घरी न राखै कोई।। तू राम नाम जप सोई।। का की मात पिता कहूं का को कवन पुरख की जोई।। घट फूटेContinue reading “मनुष्य जन्म- एक अवसर part 3”
मनुष्य जन्म- एक अवसर part 1
मनुष्य जन्म- एक अवसर part 1 आदि ग्रंथ मे पृष्ठ सं 1075 गुरु अर्जुन देव जी फरमाते है: “लाख चौरासी जोन सबाई।। मानस को प्रभ दी वड आई।।इस पौड़ी ते जो नर चुंके, सो आई जाइ दुख पाईदा।।” इन्सान को दूसरे जीवों के मुकाबले श्रेष्ठ बुद्धि इसीलिए मिली है कि वह इस चरण में अपनीContinue reading “मनुष्य जन्म- एक अवसर part 1”
परमात्मा की खोज में
परमात्मा की खोज हर एक महात्मा हम यही उपदेश देता है कि जब तक हमारी आत्मा अपने असल में जाकर नहीं समाती, तब तक इसका जन्म मरण के दुखो से छुटकारा नहीं हो सकता। इसीलिए हर एक को परमात्मा की खोज है। हम सब दुनिया के जीव अपनी अपनी अक्ल के अनुसार हजारों स्थानों परContinue reading “परमात्मा की खोज में”