प्रभात – वेला की इबादत और रात भर मालिक के वियोग में विलाप मालिक की प्राप्ति के ख़ज़ाने की कुंजी हैं । ख्वाजा हाफ़िज़ शेख शिबली एक दिन अपने शिष्यों के साथ बैठे थे । सर्दी का मौसम था , आग जल रही थी । अचानक उनका ध्यान चूल्हे में जलती हुई लकड़ी के एकContinue reading “विरह – वेदना”
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भ्रंगी की सृजना
जिस नाम रिदै सो सभ ते ऊचा ॥ गुरु अर्जुन देव भ्रंगी के साथ एक पौराणिक कथा जुड़ी हुई है । कहा जाता है कि यह एक छोटे से बिल में अंडा देती है । फिर यह अपने लार्वे के लिए कोई कीड़ा ढूँढ़ लाती है । उस कीड़े को लार्वे के सामने रखकर बिलContinue reading “भ्रंगी की सृजना”
नदी पार करने का मंत्र
यदि तुमको राई के दाने के बराबर भी विश्वास होता , तो तुम इस शहतूत के पेड़ से अगर कहते कि जड़ से उखड़कर समुद्र में लग जा , तो वह तुम्हारी मान लेता ।80 सेंट ल्यूक एक बार का ज़िक्र है , एक स्त्री किसी महापुरुष की सेवा किया करती थी । महात्मा काContinue reading “नदी पार करने का मंत्र”
धृतराष्ट्र का अंधा होना
जीव अपने सब सुख – दुःख प्रारब्ध कर्मों के अनुसार पाता है और मनुष्य जैसे भले – बुरे कर्म करता है , उनके अनुसार वैसे ही ऊँची – नीची योनियाँ भोगता है । महाराज सावन सिंह एक बार धृतराष्ट्र ने भगवान कृष्ण से पूछा कि मैं अंधा क्यों हूँ । मुझे पिछले सौ जन्मों कीContinue reading “धृतराष्ट्र का अंधा होना”
अज्ञानी सूअर
उन्होंने परमेश्वर की सच्चाई को बदलकर झूठ बना डाला और सृष्टि की उपासना और सेवा की , न कि उस सृजनहार की जो सदा धन्य है । रोमन्ज एक बार उद्धव ने भगवान कृष्ण से कहा कि इन जीवों को आप अपने देश क्यों नहीं ले चलते ? आप सर्वसमर्थ हैं और जो चाहें करContinue reading “अज्ञानी सूअर”