पपीहे का प्रण

मी जिउ चात्रिक जल प्रेम पिआसा ॥ जिउ मीना जल माहे उलासा ॥ नानक हर रस पी त्रिपतासा।। गुरु नानक एक दिन कबीर साहिब गंगा के किनारे घूम रहे थे । उन्होंने देखा कि एक पपीहा प्यास से निढाल होकर नदी में गिर गया है । पपीहा स्वाति बूंद के अलावा दूसरा पानी नहीं पीताContinue reading “पपीहे का प्रण”

बेदाग दाढ़ी

मन हमारा दुश्मन है और इसे दुश्मन समझते हुए इसकी हरकतों पर चौकीदारी करनी चाहिए । महाराज सावन सिंह एक स्त्री थी । उसके रिश्तेदारों में एक अच्छा कमाई वाला महात्मा था । कुछ तो कमाई और कुछ बेफ़िक्री और बेपरवाही के फलस्वरूप उसके चेहरे पर हमेशा रौनक़ और ख़ुशी रहती थी । उसकी शोभायमानContinue reading “बेदाग दाढ़ी”

झूठे वायदों की सज़ा

अनेक लोग अपने ज्ञान का प्रदर्शन करके अपनी प्रशंसा करवाने का प्रयास करते है पर वे धन्य हैं जिन्होंने प्रभु प्रेम के लिए अपने मन को अन्य सभी इच्छाओं से ख़ाली कर दिया है । सेंट फ्रांसिस ऑफ़ असिसी ज़िक्र है कि बुल्लेशाह बड़ा आलिम – फ़ाज़िल था । चालीस साल खोज की , बहुतContinue reading “झूठे वायदों की सज़ा”

फिर कभी जलेबी मत माँगना

साकत नर प्रानी सद भूखे नित भूखन भूख करीजै ॥ गुरु रामदास ज़िक्र है कि एक मुसलमान फ़क़ीर एक दिन बाज़ार से गुज़र रहा था । रास्ते में एक हलवाई की दुकान थी । उसने बड़ी अच्छी जलेबियाँ सजाकर रखी हुई थीं । मन ने कहा कि जलेबियाँ खानी हैं । पास पैसा था नहींContinue reading “फिर कभी जलेबी मत माँगना”

जीते जी मरना…

कबीर साहिब इस बारे में फरमाते है:(आदि ग्रंथ पृष्ठ स 1365) कबीर जिस मरने ते जग डरे मेरे मन आनंद।। गुरु नानक देव जी(आदि ग्रंथ पृष्ठ स 730) फरमाते है: नानक जीवतिया मर रहीए ऐसा जोग कमाइए।। बाइबल में सेंट पाल (बाइबल 15:31) भी कहते है “मै प्रतिदिन मरता हूं।“ अहले इस्लाम की हदीस (अहिदिसेContinue reading “जीते जी मरना…”

बकरा और बंदर

मन लज़्ज़त का आशिक़ है , जब इसे पहले से कोई अच्छी चीज़ मिल जाये तो यह पहली को छोड़ देगा , दूसरी के पीछे दौड़ेगा । इसे दुनिया की करोड़ों लज़्ज़तें दें , मन वश में नहीं आता । महाराज सावन सिंह एक बार सत्संग के दौरान एक आदमी ने खड़े होकर बड़े महाराजContinue reading “बकरा और बंदर”

हमारे प्यार का खोखलापन

परमेश्वर मेरी ज्योति और मेरा उद्धार है ; मैं किससे डरूँ ? परमेश्वर मेरे जीवन का दृढ़ गढ़ है , मैं किसका भय खाऊँ ? साम्ज़ एक बुढ़िया थी । उसकी एक जवान लड़की थी । इत्तफ़ाक़ से वह लड़की सख़्त बीमार हो गयी । बहुत इलाज करवाया लेकिन फ़ायदा न हुआ । बुढ़िया कहनेContinue reading “हमारे प्यार का खोखलापन”

व्यर्थ गयी कमाई

जनम जनम की इस मन कउ मल लागी काला होआ सिआह ॥ खंनली धोती उजली न होवई जे सउ धोवण पाह ॥ गुरु अमरदास पराशर जी सारी उम्र योगाभ्यास में रहे । पूर्ण योगी होकर घर को वापस आ रहे थे । रास्ते में एक नदी पड़ती थी । जब वहाँ आये तो मल्लाह सेContinue reading “व्यर्थ गयी कमाई”

कबीर साहिब और रानी इन्दुमती

संत जब तक शरीर में रहते हैं , यह नहीं कहते कि हम गुरु हैं । वे दीनता और नम्रता रखते हैं । महाराज सावन सिंह रानी इन्दुमती , संत कबीर जो काशी में कपड़ा बुनकर अपनी जीविका कमाते थे , की अनन्य भक्त थी । जब कबीर साहिब रानी इन्दुमती को सचखंड ले गयेContinue reading “कबीर साहिब और रानी इन्दुमती”

Spiritual link (Nov Dec 2020) by RSSB

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