रूहानी विज्ञान का उद्देश्य यही है कि मनुष्य माया के परदों से मुक्त होकर स्वयं को पहचान ले कि वह आत्मा है जो स्वयं चेतन है और महाचेतन के समुद्र का अंश है , ताकि वह उस महाचेतन सागर में मिल जाये …। महाराज सावन सिंह एक बार एक शेरनी बच्चे को जन्म देकर शिकारContinue reading “भेड़ों में शेर का बच्चा”
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शरण का प्रताप
गुरु बिन तेरा और न कोई । धार बचन यह मन में ॥ स्वामी जी महाराज भागवत में एक कथा आती है कि एक बीमार और कमज़ोर बकरी अपने घर से भटककर दूर किसी घने जंगल में चली गयी । ख़तरे भरे इतने विशाल और घने जंगल में उस का बचाव करनेवाला कोई नहीं थाContinue reading “शरण का प्रताप”
धृतराष्ट्र का अंधा होना
जीव अपने सब सुख – दुःख प्रारब्ध कर्मों के अनुसार पाता है और मनुष्य जैसे भले – बुरे कर्म करता है , उनके अनुसार वैसे ही ऊँची – नीची योनियाँ भोगता है । महाराज सावन सिंह एक बार धृतराष्ट्र ने भगवान कृष्ण से पूछा कि मैं अंधा क्यों हूँ । मुझे पिछले सौ जन्मों कीContinue reading “धृतराष्ट्र का अंधा होना”
फ़क़ीर और चींटियाँ
जिस दिल में सब जीवों के लिए प्रेम और दया होती है , उसमें विषय – विकारों के लिए कोई स्थान नहीं होता । ऐ दोस्त ! कभी किसी दिल को ठेस न पहुँचाना । किसी का दिल दुखाना प्रभु को भूल जाना है ।अन्सारी ऑफ़ हैरात ‘ तज़करात – उल – औलिया ‘ मुसलमानोंContinue reading “फ़क़ीर और चींटियाँ”
अज्ञानी सूअर
उन्होंने परमेश्वर की सच्चाई को बदलकर झूठ बना डाला और सृष्टि की उपासना और सेवा की , न कि उस सृजनहार की जो सदा धन्य है । रोमन्ज एक बार उद्धव ने भगवान कृष्ण से कहा कि इन जीवों को आप अपने देश क्यों नहीं ले चलते ? आप सर्वसमर्थ हैं और जो चाहें करContinue reading “अज्ञानी सूअर”
चोरियों की सूची
हे परमेश्वर , मुझ पर अनुग्रह कर , मुझ पर अनुग्रह कर , क्योंकि मैं तेरा शरणागत हूँ ; और जब तक ये आपत्तियाँ निकल न जायें , तब तक मैं तेरे पंखों के तले शरण लिए रहूँगा । एक बार गुरु गोबिन्द सिंह जी चोरों के एक गाँव में गये और वहाँ के लोगोंContinue reading “चोरियों की सूची”
स्वयंवर और नारद मुनि
जिउ जननी सुत जण पालती राखै नदर मझार ॥ अंतर बाहर मुख दे गिरास खिन खिन पोचार ॥ तिउ सतगुर गुरसिख राखता हर प्रीत पिआर ॥ गुरु रामदास भारत में पहले यह रिवाज था कि जब किसी राजकुमारी की उम्र शादी लायक़ होती तो एक स्वयंवर रचा जाता जिसमें राजकुमारी ख़ुद अपने पति को चुनतीContinue reading “स्वयंवर और नारद मुनि”
अंधा और भूलभुलैयाँ
कई जनम भए कीट पतंगा ॥ कई जनम गज मीन कुरंगा ॥ कई जनम पंखी सरप होइओ ॥ कई जनम हैवर ब्रिख जोइओ । मिल जगदीस मिलन की बरीआ ॥ चिरंकाल इह देह संजरीआ।। गुरु अर्जुन देव एक आदमी अंधा भी था और साथ ही गंजा भी था । थोड़ी सी ग़लती के कारण राजाContinue reading “अंधा और भूलभुलैयाँ”
अटल क़ानून
जेहा बीजै सो लुणै करमा संदड़ा खेत ॥गुरु अर्जुन देव रामायण में आता है कि बाली ने तपस्या करके वर लिया था कि जो भी लड़ने के लिए उसके सामने आये , उसका आधा बल बाली में आ जाये । इसी कारण जब भी सुग्रीव उससे लड़ाई करने जाता , पराजित होकर लौटता । इसContinue reading “अटल क़ानून”
सच्चा परोपकारी
गुलाम सदा घर में नहीं रहता ; परंतु पुत्र सदा रहता है । यदि ‘ पुत्र ‘ तुम्हें स्वतंत्र करेगा तो सचमुच तुम स्वतंत्र हो जाओगे । सेंट जॉन जेलखाने में कैदियों की बुरी हालत देखकर एक परोपकारी आता है और यह सोचकर कि इनको ठंडा पानी नहीं मिलता , दस – बीस बोरियाँ चीनीContinue reading “सच्चा परोपकारी”