अक्सर देखने को मिलता है कि साधारण व्यक्ति ही नहीं, ग्रंथो शास्त्रों के ज्ञाता, महान विद्वान और प्रवक्ता भी इन शास्त्रों की खूब जोर शोर से व्याख्या करते है, परन्तु उनका अपना जीवन शास्त्रों में दिए उपदेश से बिल्कुल उलट होता है। संतो महात्माओं ने इस प्रकार के पाठ विचार करने वालों को चंड़ुल पक्षीContinue reading “पाठ आध्यात्म की नजर से”
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निंदा आध्यात्म की नजर से..
गुरु अर्जुन देव जी (आदि ग्रंथ पृष्ठ स ३१५) फरमाते है: अवखध सभे कितीअन, निंदक का दारू नाहि ।। सब किए की माफ़ी है पर निंदा रूपी अपराध की माफ़ी बहुत मुश्किल है। संत मत में रूहानी तरक्की के लिए अवगुणों का त्याग करने और गुणों को धारण करने का उपदेश दिया जाता है। परमार्थीContinue reading “निंदा आध्यात्म की नजर से..”
गुरु और गोविंद एक ही है
गुरु और गोविंद एक ही है संत दादू दयाल जी फरमाते है: जहां राम तह संत जन, जह साधू तह राम। दादू दून्यू एकठे, अरस परस बिश्राम।। सच्चे संत परमात्मा में मिलकर परमात्मा रूप हो चुके होते है। अतः परमात्मा कि प्राप्ति संतो द्वारा है हो सकती है और संत परमात्मा की कृपा से हीContinue reading “गुरु और गोविंद एक ही है”
असली मंदिर और मस्जिद
हर मंदर एह सरीर है, गियान रतन प्रगट होई।। (आदि ग्रंथ पृष्ठ स 1346) हमारा शरीर ही मालिक के रहने का असली हरि मंदिर है और उस मालिक का असली ज्ञान उसी के अंदर से प्राप्त हो सकता है तुलसी साहिब हाथरस वाले फरमाते है (संत बानी पृष्ठ स ४४) नकली मंदिर मस्जिदों में जायContinue reading “असली मंदिर और मस्जिद”
कौन है मेरा रिश्तेदार या मित्र?
संत हमेशा से हमे रिश्तों की असलियत समझाते है, ताकि हम इनके मोह में फसकर संसार में आने के अपने असल उद्देश्य को न भुला दे। आदि ग्रंथ (पृष्ठ स 700) पर गुरु अर्जुनदेव जी फरमाते है कोई जाने कवन ईहा जग मीत।। जिस होई कृपाल सोई बिधि बुझे ता की निर्मल रीति।। मात पिताContinue reading “कौन है मेरा रिश्तेदार या मित्र?”
गलत यात्रा (wrong path)
अगर दिन में जब आप किसी भी समस्या का सामना नहीं करते है तो – आप यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि आप गलत रास्ते पर चल कर रहे हैं।” – स्वामी विवेकानंद आज सुबह ये सुंदर विचार पढ़ा तो सोचा आपके साथ सांझा करू। स्वामी विवेकानन्द जी कहते है कि अगर हमारी जिंदगी बहुतContinue reading “गलत यात्रा (wrong path)”
क्यों कोसता है खुद को
क्यों कोसता है खुद को संतों की एक सभा चल रही थी,किसी ने एक दिन एक घड़े में गंगाजल भरकर वहां रखवा दिया ताकि संत जन जब प्यास लगे तो गंगाजल पी सके। संतों की उस सभा के बाहर एक व्यक्ति खड़ा था। उसने गंगाजल से भरे घड़े को देखा तो उसे तरह-तरह के विचारContinue reading “क्यों कोसता है खुद को”
जाति- पाति आध्यात्म की नजर से
संतो महात्माओं ने हमेशा से एकता का उपदेश दिया है। वे हमको हर प्रकार के द्वैत से ऊपर उठकर समदर्शी बनने का उपदेश देते है। संत महात्मा समझाते है कि परमात्मा ने सब इंसान एक जैसे बनाए है। मजहब, मुल्क, कोम, नस्ल और जाति पाति के सब तरह के भेद भाव इंसान के बनाए हुएContinue reading “जाति- पाति आध्यात्म की नजर से”
मन क्या है? इसे कैसे जीते?
मन की रचना के बारे में गुरु नानक साहिब फरमाते है (आदि ग्रंथ पृष्ठ स ४१५) ईह मन करमा ईह मन धरमा।। ईह मन पंच तत ते जनमा।। कबीर साहिब कहते है: (आदि ग्रंथ पृष्ठ स ३४२) ईह मन सकती ईह मन सीउ।।ईह मन पंच तत को जीउ।। गुरु नानक साहिब और कबीर साहिब यहContinue reading “मन क्या है? इसे कैसे जीते?”