संसार या इस रचना को चार हिस्सों में बाटी का सकती है – अंडज, जेरज, स्वेदज और उदभिज्ज। अंडज: वे जीव है जो अंडो में से पैदा होते है, जैसे चिड़िया, कबूतर, पक्षी आदि जेरज: ये से जीव है जो झिल्ली में लिपटे हुए पैदा होते है, जैसे भैंस, गाय, जानवर आदि। इंसान भी इसीContinue reading “संसार के जीवों के हिस्से”
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असली फकीरी
एक राजा ने किसी फकीर संत की प्रशंसा के किस्से सुने तो उसके दर्शन करने वहां पहुंच गए। मुलाकात के बाद राजा ने औपचारिकतावश फकीर से कहा, ”महात्मा जी, आप इस सूखे पेड़ के नीचे रह रहे हैं, यह मुझे अच्छा नहीं लगा। मेरा आपसे अनुरोध है कि आप मेरे राजमहल में चलकर वहां रहें।”Continue reading “असली फकीरी”
सच्चा त्याग
त्याग शब्द का अर्थ है किसी वस्तु या विचार को मन से छोड़ देना। पर आध्यात्मिक रूप से त्याग का मतलब है कर्मो के फल का त्याग करना अथवा निष्काम कर्म करना। यदि कोई मनुष्य बिना फल की इच्छा के कोई कर्म करे तो उसे निष्काम कर्म कहते है। क्योंकि हम कर्म किए बिना रहContinue reading “सच्चा त्याग”
तीन लोक और तीन गुण
परमात्मा ने शब्द या नाम के जरिए इस सृष्टि की रचना की है और फिर काल और माया भी पैदा की। फिर माया से तीन देवता पैदा हुए। ब्रम्हा , विष्णु और महेश जो इस सृष्टि को चला रहे है। जिसे तीन लोक यानी आकाश, प्रथ्वी और पाताल के स्वामी भी कहते है। तीन गुणContinue reading “तीन लोक और तीन गुण”
नाम या शब्द की ताकत
सतगुरु के आशिक़ का ख़ून सूख जाता है यानि आशिक़ों के तन में ख़ून नहि बचता महाराज चरण सिंह जी के जमाने की बात है एक सेवादार जिसका नाम था श्री राम दास जो दिल्ली से Beas भंडारे के डीनो में कैंटीन में सेवा करने के लिए आता था और वो दिल्ली से पेदल चलContinue reading “नाम या शब्द की ताकत”
Disciple’s relationship with the master
Someone asked Maharaj Charan Singh Ji what the disciple’s relationship with the master is? And the Master answered : What is there to talk about ? Who is the disciple and who is the master ? Neither the body of the disciple is the disciple, nor the body of the master is the Master. SoContinue reading “Disciple’s relationship with the master”
True Renunciation
Bhagwat Geeta, chapter five, slok 6
जीवित गुरु (मौजूदा गुरु)
पिछलो की जो धारे टेका । जिन को कभी आंख नहीं देखा।। पोथिन में सुनी उनकी महिमा। टेक बांध में सब का भरमा।। सब मिल करते पिछली टेका। वक्त गुरु का खोज न नेक।। बिन गुरु वक्त भक्ति नहीं पावे। बिना भक्ति सतलोक न जावे।। वक्त गुरु जब लग नहीं मिलइ। अनुरागी का काज नContinue reading “जीवित गुरु (मौजूदा गुरु)”
गुरू पूर्णिमा पर गुरू को कोटि कोटि नमन ।
परमात्मा का हुकुम
इस संसार में जो कुछ हो रहा है उस मालिक के हुक्म से हो रहा है यानी जो भी हमारे पास है उसी के हुक्म से है और जो भी जा रहा है उसी के हुक्म से जा रहा है। पर जो अज्ञानी जीव ये समझ रहा है कि मैने किया है तो यह उसकीContinue reading “परमात्मा का हुकुम”