बादशाह का ख़ाली हाथ

यदि मनुष्य सारे जगत को प्राप्त कर ले और अपनी आत्मा को खो दे , तो उसे क्या लाभ होगा । सेंट मार्क महमूद ग़ज़नवी ने हिंदुस्तान पर सत्रह हमले किये और बहुत – सा धन – दौलत , सोना – चाँदी , हीरे रे – जवाहरात लूटकर ग़ज़नी ले गया । वह तुर्क थाContinue reading “बादशाह का ख़ाली हाथ”

बेदाग दाढ़ी

मन हमारा दुश्मन है और इसे दुश्मन समझते हुए इसकी हरकतों पर चौकीदारी करनी चाहिए । महाराज सावन सिंह एक स्त्री थी । उसके रिश्तेदारों में एक अच्छा कमाई वाला महात्मा था । कुछ तो कमाई और कुछ बेफ़िक्री और बेपरवाही के फलस्वरूप उसके चेहरे पर हमेशा रौनक़ और ख़ुशी रहती थी । उसकी शोभायमानContinue reading “बेदाग दाढ़ी”

फिर कभी जलेबी मत माँगना

साकत नर प्रानी सद भूखे नित भूखन भूख करीजै ॥ गुरु रामदास ज़िक्र है कि एक मुसलमान फ़क़ीर एक दिन बाज़ार से गुज़र रहा था । रास्ते में एक हलवाई की दुकान थी । उसने बड़ी अच्छी जलेबियाँ सजाकर रखी हुई थीं । मन ने कहा कि जलेबियाँ खानी हैं । पास पैसा था नहींContinue reading “फिर कभी जलेबी मत माँगना”

भूत

एक आदमी ने एक भूत पकड़ लिया औरउसे बेचने शहर गया।संयोगवश उसकी मुलाकात एक सेठ से हुई।सेठ ने उससे पूछा – भाई ! यह क्या है ?उसने जवाब दिया कि यह एक भूत है।इसमें अपार बल है।कितना भी कठिन कार्य क्यों न हो,यह एक पल में निपटा देता है।यह कई वर्षों का काम मिनटों मेंContinue reading “भूत”

जीते जी मरना…

कबीर साहिब इस बारे में फरमाते है:(आदि ग्रंथ पृष्ठ स 1365) कबीर जिस मरने ते जग डरे मेरे मन आनंद।। गुरु नानक देव जी(आदि ग्रंथ पृष्ठ स 730) फरमाते है: नानक जीवतिया मर रहीए ऐसा जोग कमाइए।। बाइबल में सेंट पाल (बाइबल 15:31) भी कहते है “मै प्रतिदिन मरता हूं।“ अहले इस्लाम की हदीस (अहिदिसेContinue reading “जीते जी मरना…”

सबसे बड़ा कौन ?

गुरु और मालिक में कोई अंतर नहीं , दोनों वास्तव में एक ही हैं । महाराज सावन सिंह एक पादरी हमेशा बड़े महाराज जी के साथ बहस करता रहता था । एक बार जब आप ब्यास स्टेशन पर उतरे , तो वह बोला कि एक सवाल का जवाब दो । आपने कहा , ‘ बड़ीContinue reading “सबसे बड़ा कौन ?”

बकरा और बंदर

मन लज़्ज़त का आशिक़ है , जब इसे पहले से कोई अच्छी चीज़ मिल जाये तो यह पहली को छोड़ देगा , दूसरी के पीछे दौड़ेगा । इसे दुनिया की करोड़ों लज़्ज़तें दें , मन वश में नहीं आता । महाराज सावन सिंह एक बार सत्संग के दौरान एक आदमी ने खड़े होकर बड़े महाराजContinue reading “बकरा और बंदर”

रूस का बादशाह पीटर

गुरु स्थूल शरीर में ही सीमित नहीं होता । लोगों की रहनुमाई करने , उन्हें समझाने , उनसे हमदर्दी दिखाने , उनसे प्रेम करने , उनमें विश्वास और भरोसा पैदा करने , उनमें अपने अंदर शांति और आनंद की तलाश का शौक़ पैदा करने , उन्हें रास्ता दिखाने , उन्हें एक मिसाल बनकर समझाने ,Continue reading “रूस का बादशाह पीटर”

सिकंदर महान की अंतिम इच्छा

मेरे आगे मैं खड़ा , ता भै रह्या लुकाइ । दादू परगट पीव है , जे यहु आपा जाइ ॥ संत दादू दयाल सिकंदरे – आज़म , जिसको विश्व विजयी कहते हैं , जब सारी दुनिया को जीतता हुआ भारत के उत्तर – पश्चिम में ब्यास नदी के पास आया , तो फ़ौज ने आगेContinue reading “सिकंदर महान की अंतिम इच्छा”

हमारे प्यार का खोखलापन

परमेश्वर मेरी ज्योति और मेरा उद्धार है ; मैं किससे डरूँ ? परमेश्वर मेरे जीवन का दृढ़ गढ़ है , मैं किसका भय खाऊँ ? साम्ज़ एक बुढ़िया थी । उसकी एक जवान लड़की थी । इत्तफ़ाक़ से वह लड़की सख़्त बीमार हो गयी । बहुत इलाज करवाया लेकिन फ़ायदा न हुआ । बुढ़िया कहनेContinue reading “हमारे प्यार का खोखलापन”

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