पूर्ण सतगुरु की आवश्यकता

गुरु के मिलने के बहुत लाभ है। यहां जितनी बार भी गुरु या सतगुरु के बारे कहा गया है इसका तात्पर्य वक्त के पूर्ण गुरु या सतगुरु से ही है।सच तो यह है कि उसके बिना जीवात्मा का कुछ नहीं बनता। प्रभु जब किसी को भक्ति की दात बक्शता है तो गुरु के जरिए ही बक्शता है।सतगुरु के बिना नाम का सिमरन न किया जा सकना कोई हैरानी वाली बात नहीं है। यह खुद मालिक का बनाया गया विधान है:

आदि ग्रंथ पृष्ठ स 556 में गुरु अमरदास जी ने फरमाया है :

धुर खसमे का हुक्म पाया, विण सतगुरु चेतिया न जाइ।।
एक जगह और ( पृष्ठ स 1046)आप फरमाते है:

बिन सतगुरु को नाउ न पाए, प्रभ ऐसी बड़त बनाई हे।।
इसी लिए इस नियम को तोड़ना किसी के लिए भी संभव नहीं। अगर कोई सतगुरु की सहायता के बिना परमात्मा के बारे में सोच रहा है तो उसके लिए उद्धार का मार्ग कैसे खुले? इस असलियत से अनजान लोग तरह तरह के उपाय करने में कसर नहीं छोड़ते, फिर भी उनको सफलता नसीब नहीं होती:
आदि ग्रंथ पृष्ठ स 51 में गुरु अर्जुन देव जी फरमाते है:

कोट जतना कर रहे, गुर बिन तरियो न कोई।।

चाहे कितने भी जतन क्यों ना कर लो । गुरु के बिना इस संसार रूपी भवसागर से पार नहीं हो सकते। 
अपनी बुद्धि के पीछे लगकर शुभ भावना के साथ किए जाने वाले कर्मो में लगे रहना वैसा ही है जैसा कोल्हू के बैल का एक ही चक्र में घूमते जाना। बैल को तो शायद अपनी आंखो की पट्टी में से अपने सफर की व्यर्थता का कुछ आभास हो भी जाता हो, पर मनुष्य को माया की मोटी पट्टियां कुछ भी नजर नहीं आने देती।
हर मजहब के संत इसी बात का प्रमाण देते है जैसे

कुल्लियात बुल्लेशाह दोहा स 31 में बुल्लेशाह जी फरमाते है:

बिन मुर्शीद कामल बुल्लेया, तेरी इवे गई इबादत कीती।।

आप भी यही कहते है कि बिना पूर्ण (कामिल) गुरु( मुर्शीद) के हमारी पूजा या इबादत बेकार जाती है।


मीरा सुधा सिंधु पृष्ठ स 196 पर मारवाड़ की मीराबाई फरमाती है:

हरि बिन रहयो न जाय, गुर बिन तारियो न जाय।।

हरि बिंरह नहीं सकते और गुरु बिना इस संसार रूपी भवसागर से पार नहीं हो सकते।


पलटू साहिब की बानी, भाग 1, कुंडली 14 में आप फरमाते है:

कोटीन करे उपाय भटक सगरो से आवे।संत दुवारे जाय नाम को घर तब पावे।।

करोड़ों उपाय कर ले मुक्ति के, पर बार बार वापस इस संसार में अलग अलग योनियों में आना पड़ेगा। सिर्फ संत के द्वार पर जा कर अपने असली घर जाने का रास्ता मिलता है।इसलिए हमे अगर परमशांति, परमसुख, जन्म मरण से मुक्ति चाहते है तो हमें पूर्ण सतगुरु की आवश्यकता है।अब सवाल पैदा होता है कि हम निर्बल इंसान एक इंसान की पहचान सही से नहीं कर पाते है तो पूर्ण सतगुरु की क्या पहचान कर सकते है तो संतो ने आप ही अपनी बाणियो के जरिए बताया है। कल जरूर पड़े पूर्ण गुरु की पहचान के बारे में…….।

Published by Pradeep Th

अनमोल मनुष्य जन्म और आध्यात्मिकता

3 thoughts on “पूर्ण सतगुरु की आवश्यकता

    1. पूर्ण सतगुरु हर काल में मौजूद रहते है। हमें तो सिर्फ परमात्मा से मिलने की सच्ची प्रार्थना करनी है।

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