
संत महात्मा हमे उपदेश करते है कि परमेश्वर प्राप्ति का साधन और मार्ग मनुष्य द्वारा बनाया हुआ नहीं, परमात्मा द्वारा ही बनाया गया है।
आदि ग्रंथ पृष्ठ स ११२२ पर गुरु अर्जुन देव जी फरमाते है : “मारग प्रभ का हरि किया संतन संग जाता।।” यह साधन और मार्ग एक, अनादि और सर्वसांझा है। इसमें न कभी परिवर्तन हुआ है और न ही हो सकता है।
संत महात्मा हमे उपदेश करते है की जब सबने एक ही परमेश्वर मिलाप करना है, वह परमेश्वर और उससे मिलाप का मार्ग हर एक के अंदर है, तो यह किसकी अक्ल में आता है कि परमात्मा ने हिन्दुओं के अंदर अपने मिलने का कोई एक साधन और मार्ग रखा हो और मुसलमानों, सिखों, ईसाईयों के अंदर कोई दूसरा साधन और मार्ग रखा हो। जो लोग संतो के उपदेश के मुताबिक अंतर में खोज करते है, उनके लिए एक ही साधन और मार्ग है। जो मन बुद्धि द्वारा बाहर खोज करते है, वे अनेक साधनों और मार्गो में भटकते रहते है, उनके हाथ पल्ले कुछ नहीं पड़ता। जब तक हम अपने मन की मत त्यागकर स्वय ईश्वर द्वारा अपने साथ मिलाप के लिए बनाए अंतर्मुख साधन को नहीं अपनाते, हम कभी अपने साथ मिलाप नहीं कर सकते।
उस प्रभु ने स्वय यह साधन और मार्ग बनाया है कि जीव जब भी प्रभु से मिलाप कर सकेगा, शब्द या नाम की कमाई द्वारा कर सकेगा और शब्द या नाम की प्राप्ति संत सतगुरु द्वारा होगी। इसीलिए हमें कोमो, मजहबों, मुल्कों के छोटे छोटे दायरों और मनुष्य द्वारा बनाए भेदभाव से ऊपर उठकर शब्द रूपी अंतर्मुख सच्ची एकता में आने की कोशिश करनी चाहिए।
सच कहा आपने ईश्वर का मंदिर में के अंदर है।बाहर तो सियासत है और वोट की मांग है।
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जी
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🙏🙏
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