शम्स तब्रेज के कलाम में आता है : यदि तू रब्ब का दीदार करना चाहता है तो उन ( संतो ) के चरणों की धूलि को अपनी आंखों का सुरमा बना क्योंकि उनमें जन्म से अंधे को भी आंखें दे सकने की सामर्थ्य है । अंधों से आपका भाव ऐसे लोगों से हैं जिनको सर्वव्यापक परमात्मा कहीं नजर नहीं आता।
यहां आंख देने का भाव वह हमे अपने अंतर का ज्ञान देते है जिससे हमे सर्वव्यापक परमात्मा नजर आने लगता है।

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Nice sharing. 🙏🙏🙏
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